
कहने को तो प्राचीनतम विज्ञान खगोलशास्त्र है जिसे पढ़ना समझना और भरोसा करना अलग अलग स्तर पर लगभग असंभव ही जान पड़ता है. स्टीफन हॉकिन्स की इस पुस्तक A Brief History of Time को सरल हिन्दी भाषा में पढ़ने के बाद ही खगोल शास्त्र के विभिन्न आयामों को समझ पाना मुझ जैसे आम साधारण मानवी के लिए क्वांटम फिजिक्स जैसा प्रतीत हुआ. हालाँकि स्टीफन हॉकिन्स जैसे मूर्धन्य वैज्ञानिक, जिज्ञासु और अतिज्ञानी की इस पुस्तक प्रस्तुति पर कोई प्रश्नचिन्ह खड़ा करना सूर्य को टॉर्च दिखाने जैसा है परंतु मुझे प्रतीत होता है कि खगोल शास्त्र की वैज्ञानिक भाषा, वैज्ञानिक तर्क और वस्तुस्थिति के साथ विभिन्न अवयव और गहराई को मात्र कल्पना के रास्ते समझ पाना लगभग दुरूह कार्य हैं.
सौर मंडल की रचना से लेकर आकाश गंगा तक के सिद्धांत की अवधारणा का विवरण अवचेतन मन में पड़े स्कूली ज्ञान से पुष्ट होता है परन्तु जैसे ही ब्लैक होल, पृथ्वी की उत्पत्ति के अतिरिक्त कहीं जीवन की अवधारणा के शुरुआती दौर में बिग-बैंग और समय की कल्पना इत्यादि को कम से कम पहली बार पढ़कर समझ पाना अल्प ग्यानी के लिए बड़ा कष्टप्रद अनुभव प्रतीत हुआ इसलिये खगोल की विज्ञान को जटिल तब विज्ञान कहा जाता है जहाँ अंतरिक्ष में स्थित ग्रहों, सौर-मंडलों,आकाशगंगाओं निहारिकाओं, ब्लैक होल, बिग बैंग जैसे और जीवन की वो अपनी जैसे ही सिद्धांतों का प्रतिपादन है ना समझ में आता है और न ही आगे के पठन के लिए कोई रुचि क़ायम रख पाता हूँ.
क्या भगवान है ?
यह सब कैसे शुरू हुआ ?
ब्रह्मांड में क्या कोई दूसरा बौद्धिक जीवन भी है ?ब्लैक होल के भीतर क्या है ?,
जैसे रुचिकर विषयों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है
वहीं पे
खगोलशास्त्र सबसे पहला विज्ञान था जो विकसित हुआ!
ईश्वर विज्ञान के नियमों में हस्तक्षेप नहीं करता!
छह करोड़ 60 लाख वर्ष पूर्व कोई छोटी चीज़ प्रथ्वी से टकरायी होगी तभी डायनोसॉर हुए होंगे !
औसतन दो करोड़ वर्ष में ऐसा होता है!
जैसे महावाक्य विस्मित आवश्यक करते हैं
व्यक्तिगत अनुभव रहा है कि खगोलशास्त्र से सम्बन्धित जो भी वीडियो प्रस्तुतियां ओ टी टी प्लेटफार्म पर उपलब्ध है वे वीडियो कॉन्टेंट भी इस नक्षत्र- विज्ञान की जटिलताओं की पुष्टि करता है और सच में विज्ञानी आइंस्टाइन जैसे मानस के धनी होते होंगे जिन्हें रिलेटिविटी या स्ट्रिंग थ्योरी जैसी सिद्धान्त समझ में आ जाते हैं.
तो इस पुस्तक को पढ़ने का अनुभव मेरे लिए जटिल रहा और कसैले स्वाद का दोष मैं स्वयं की बुद्धि को देना चाहूंगा.
स्टीफन हॉकिंग की बुद्धि कौशल,लेखन क्षमता, परी कल्पनाओं की उड़ान साधुवाद के पात्र हैं जिन्होंने सरल भाषा में लिखे खगोलशास्त्र को सरल बनाने का प्रयास तो किया है.
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