The Laundromat: Movie Review

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अमेरिका बड़ा विकसित देश है और अनुशासित भी, जैसा कि बाहर से प्रतीत होता है. द लॉंड्रोमैट नाम की एक मूवी को देखने का अवसर हुआ. इस मूवी टाइटल का शाब्दिक तात्पर्य है कपड़े धोने का पब्लिक आउटलेट जहाँ पैसे देकर मशीन में कपड़े धुलवाकर सुखाकर वापस ला सकता है.

इस नाम से निर्मित यह चलचित्र फर्जी बीमा कंपनी की स्थापना कर या भ्रष्टाचार के माध्यम से रिश्वत की अकूत संपत्ति को शैल कंपनी याने अक्रिय या नाममात्र की कंपनियों के माध्यम से पैसा सुरक्षित किया जाए. ये कंपनियाँ दुनिया के इतने छोटे देशों में स्थापित किया जाती हैं जहाँ ऑफ़शोर खाताधारक धन्ना सेठ को न टैक्स देना पड़ेगा न उसकी चोरी हो सकेगी और भ्रष्टाचार की काली दौलत अपने खाते में बनी रहे जिसकी ख़बर ना राज्य सरकार को है, ना केंद्र सरकार को है, ना न्यायालय को है, ना रेवन्यू विभाग को है, ना इनकम टैक्स विभाग को है. बस अरबों की धनराशि को घुमाने का विज्ञान है, जीवन के प्राकृतिक नियमों के सर्वथा विपरीत होते हुए गोरखधंधे का संजाल है.

Secrecy World नामक पुस्तक पर आधारित यह चलचित्र हिन्दी में उपलब्ध है, समझने में थोड़ी समस्या ज़रूर आती है परंतु भ्रष्टाचार का दल दल सरकारी अथवा ग़ैर सरकारी और यहाँ तक कि पारिवारिक स्तर पर किस हद तक विष की तरह फैला हुआ है यह मानव मन की कमज़ोर यथा रोग तुल्य मनः स्थिति को प्रदर्शित करता है. यदि वित् में आपकी रुचि है तो यह चलचित्र आवश्यक रूप से देखने योग्य है.

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