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Blog No 450


चतुर्युग दर्श :

चतुर्युग दर्श कुछ यूँ समझे-


काल – सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलियुग
रघुवंश – राम भारत लक्ष्मण शत्रुघन
अतिरेक बुराई – काम क्रोध मद लोभ
कर्म – साम दाम दण्ड भेद


आश्रम – ब्रह्मचर्य गृहस्थ वानप्रस्थ संन्यास
छात्रत्व – विवेक वैराग्य शमदमादी मुमुक्षत्व
4 कार – संस्कार सहकार अहंकार सरकार
पीठ – शारदा द्वारिका, ज्योतिष बद्रीनाथ, गोवर्धन पुरी श्रेंगेरी रामेश्वरम


4 फल – धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष
वेद – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अर्थववेद
उपवेद – आयुर्वेद, धनुर्वेद, गन्धर्ववेद, अर्थ-वेद
दिशा – पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण

जीव श्रेणी – अंडज, जरायुज, स्वेदज , उद्भिज
विष्णु के 4 मानस पुत्र – सनक, सनंदन, सनत्कुमार , सनातन
धाम – बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, रामेश्वरम, द्वारिका
वर्ण- ब्राहम्ण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र

सदा पालन योग्य – सत्संग , संतोष, दान, दया
बिगाड़ तत्व – जवानी, धन, अधिकार, अविवेक
कुसंग – नास्तिक , अन्याय धन , परायी नारी, परनिंदा.
विपत्ति में परीक्षा – धीरज की, धर्म की, नारी की, मित्र की

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