
एक घटना में, एक ठेकेदार निर्माणाधीन इमारत की 20वीं मंजिल से फिसल गया और छठी मंजिल की खिड़की पर, उसकी पत्नी खाना बना रही थी, जैसे ही वह हवा में छठी मंजिल पर पहुँचा, वह चिल्लाया, “जानू! आज दो रोटियाँ कम बनाना।” जब उसकी पत्नी ने पूछा कि क्यों, तो उसने कहा, “या तो मैं हमेशा के लिए चला जाऊँगा या अगर भगवान ने मुझे बचा लिया, तो मैं अस्पताल पहुँच जाऊँगा, इसलिए मैं कुछ नहीं खाऊंगा.”
यह एक ऐसी मानसिक स्थिति है जहाँ, 20वीं मंजिल से गिरने के बाद भी, वह अभी भी धनात्मक है, सकारात्मक है.
जब वही व्यक्ति हवा में गिरते हुए दूसरी मंजिल पर पहुँचा, तो उसके दोस्त ने उसे देखा कि भाई ठेकेदार क्या हो रहा है, और उसने कहा कि अब तक तो सब ठीक ही है.!
सकारात्मकता जीवन जीने, किसी घटना को अंजाम देने और उस जीवन को पाने का एक बिल्कुल अलग पहलू है जिसके लिए वास्तव में खुश मन जीवन जीने की चाह चाहिए.
एक सकारात्मक व्यक्ति हमेशा खुश हो भाग्यशाली विचारधारा का वाहक हो कर सोचता है, यह दर्शाता है कि ज़्यादातर विपरीत परिस्थितियों में भी, वह आसपास की सभी नकारात्मक परिस्थितियों से भी सकारात्मक परिणाम पाने के बारे में सोचता रहता है.
सकारात्मकता किसी भी समय किसी को नुकसान नहीं पहुँचाती, बल्कि जीवन को जैसे भी मिले, उसे वैसे ही जीने का नज़रिया देती है.
इस तरह सकारात्मक दृष्टिकोण जिसकी आंतरिक स्मृति में दर्ज हो गया, उसे भगवान की शुद्ध भक्ति मिली जैसे वह ठेकेदार बीसवे माले से गिरते हुए ज़मीन पर रेत के बड़े ढेर पर गिरा और उसकी जान बच गई.
आंग्ल भाषा में एक बड़ी अच्छी कहावत है जो स्वयं की मदद करता है, अलौकिक सत्ता भी उसी की सहायता करते हैं. सकारात्मकता या वैचारिक धनात्मकता जीवन में उन्नति प्रगति एवं सफलता की परिचायक है
Leave a comment