
सत्तू आमतौर पर गर्मियों में खाया जाने वाला पौष्टिक पाउडर है जो उत्तर भारत के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पसंदीदा उप-आहार है. प्रोटीन के स्रोतों में जीव हत्या उपरांत जीव जंतु के मांस पर आधारित प्रोटीन की उपयोगिता और विश्व में स्थापित किए जाने के प्रयास किए जाते रहे हैं परंतु प्रोटीन के वनस्पति जगत में उपस्थित अनाजों और दालों के माध्यम से उपलब्ध प्रोटीन न केवल उच्च स्तरीय है बल्कि कोलेस्ट्रॉल जैसे तत्वों के न्यून स्तर को प्रदाय करने में भी सहायक है.
चना, जौ और किसी अनाज जैसे गेहूं, चावल के उष्मा उपचार के बाद उसे पीसकर आटा स्वरूप में सत्तू को परिष्कृत कर तैयार किया जाता है. सत्तू न केवल प्रोटीन का उत्तम स्रोत है बल्कि पर्याप्त शर्करा और वसा के साथ विटामिन बी काम्प्लेक्स के साथ साथ मिनरल्स जैसे कैल्शियम मैग्नीशियम आयरन फास्फोरस पोटैशियम एवं सोडियम का भी उत्तम स्रोत है.
जैसा नाम से स्थापित है सत्तू आदर्श रूप में 7 प्रकार के अनाजों का घालमेल है जिनमें मक्की, जौ, ज्वार, मटर, चना, बाजरा और चावल जैसे अनाज मिलाये जाते हैं. स्वाद अनुसार 3-4 अनाज को भी मिलाकर सत्तू बनाया जाता है. इन सभी अनाज को पर्याप्त पानी में धुलकर पर्याप्त शीप में सिखाकर कर भाड़ में भूंजा जाता हैं जहाँ तेज आँच में अनाज के ये बीज उपचारित किये जाते हैं. पश्चात् इन ऊष्मा उपचारित बीजों को पत्थर के हाथ चक्की या आधुनिक चक्की में पीस लिया जाता है.
अब आपका शुद्ध, देशी, प्राकृतिक, पौष्टिक और आर्गेनिक फ़ास्ट फ़ूड सत्तू तैयार है जिसे जब जरा से भूख लगे पानी में शक्कर, गुड़ या नमक – लाल मिर्ची के साथ खाया का सकता है. सत्तू ऐसा भोज पदार्थ है जिसे खाने के लिए द्रव या ठोस रूप में जब चाहो खा लो. यात्रा में ऑफिस में स्कूल कॉलेज में या पिकनिक में या घर में सत्तू की उपयोगिता स्थापित है हर स्तर पर चाहे स्वाद की बात हो या पौष्टिकता की.
सत्तू के व्यंजनों में लड्डू, लस्सी, लिट्टी, पराठा के विभिन्न रूपों में स्वादिष्ट व्यंजन स्वीकार्यता है.
अब तो सारथी का सेवन 12 माह ही किया जाता है.
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