
एक बार कान्हा किसली जबलपुर के जंगलों में जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जहाँ मुख्य आकर्षण बाघ के दर्शन हैं जो अति प्राकृतिक परिस्थितियों में विचरण करते हैं, यदा कदा दिखाई पड़ जाते हैं. आम तौर पर आसानी से बाघ के दर्शन नहीं होते हैं परंतु जंगल अपने आप में एक अद्भुत संपत्ति है जो प्रकृति के विभिन्न आयामों आरोपों और पारिस्थितिकी संतुलनों का ऐसा समावेष प्रस्तुत करती है जिससे आश्चर्य चकित हुए बिना नहीं रहा जा सकता है.
जहाँ हम सब बाघ खोजने में लगे थे वहाँ एक अजब अनुभव हुआ जब एक खुली पेट्रोल जीप लगभग 4 घंटे एक ही स्थान पर खुले मैदान में खड़ी रही. जहाँ हम जंगल के हिंसक राजा बाघ की खोज में अपने पेट्रोल चालित वाहन के माध्यम से जंगल की गलियों में धूल फांक रहे वहाँ यह विदेशी पर्यटकों से भरी जीप 1 ही स्थान पर लगभग चार घंटे खड़ी रही.
…और पूछा जाने पर कि आप यहीं क्यों रुके हैं ?उन्होंने कहा हम लोग न्यू यॉर्क से आए हैं और यहाँ पक्षियों के कलरव को सुन आनंदित हो रहे हैं !
ऐसा आश्चर्य हुआ कि पक्षियों की चहचहाहट जो प्राकृतिक संपदा हमारे नेपथ्य में यदा कदा नहीं लगभग निरंतर ही हमारे घर के आसपास खेत खलिहान घर कॉलोनी बाग बगीचे में प्रस्तुत होती रहती है वह किसी के लिए भी एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना हो जाती है.
आश्चर्यचकित हुआ मैं!
आज प्रातः चिड़ियों का कलरव को सुनते हुए यह विचार उत्पन्न हुआ प्रकृति अपना संगीत नाना प्रकार से अद्भुत रूप अपनी धरोहर को सभी सुधि जनों के लिए प्रस्तुत करती है
मुदित हुआ मैं!
हम ही हैं जो मिली हुई वस्तु को पहचानने, आनंदित होने अथवा सहेजने का कोई प्रयास नहीं करते?
विकलित हुआ मैं!

विचार कीजिएगा

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