
प्रकृति की बनायी रचना में सभी जीवों को जीने का पर्याप्त और समुचित अधिकार है जहाँ सामाजिक व्यवस्था में सहजीवन भी अपने आप में एक अनुकूल प्राकृतिक व्यवस्था है. पिछले कुछ दशकों में सड़कों, बाग़-बगीचों, खेत-खलिहानों, गाँव-खेड़ों, शहरों में आवारा कुत्तों का प्रादुर्भाव न केवल में बढ़ा है बल्कि घातक स्तर तक पहुँचा है.
जटिल प्रश्न यह है कि भारतीय परिवेश में इन स्वयंभू केतुराज से स्वयं की रक्षा किस प्रकार से की जाए. ?अधिक ना कहते आवारा कुत्तों से बचाव के उपायों पर विचार किया जाए
१. छड़ी
हाथों में एक छड़ी रखी जाने से सड़क के आवारा देशी कुत्तों में एक क़िस्म का भय रहता है. छड़ी भी दो प्रकार की हो सकती है. टेकू – छड़ी जो बुढ़ापे में ज़मीन पर टेककर चलते हुए आगे बढ़ा जाए.
तथा दूसरी छड़ी हत्था छड़ी जो बेंत या रूलर की भाँति हाथ में रखी जाए. छड़ी नुमा हथियार प्राकट्य रूप में हानिकारक भले न प्रतीत हों परंतु कुत्ते या अन्य जीव के हमला करने पर सुरक्षा में सहायक होगी. ये टेकू छड़ी लकड़ी या मेटल की हो सकती है.
२.पानी की बॉटल
स्टील की बनी पानी की बॉटल भी सुरक्षा का सुविधाजनक उपाय हो सकता है जिसे हाथ में रखा जाए ताकि आवारा श्वानों को आसानी से प्रदर्शित हो और सब संभावित हमले की आशंका में कुत्तों के सामने इस पानी की बॉटल को लहराया जा सके.
याद रहे फेंक के मार देने से आप निहत्थे हो जाएंगे इसलिए इसे लहराना ही उचित है. और हमला हो ही जाए तो ये बॉटल हथियार बना कर आक्रांता को चोट पहुँचा सकती है.
३. अन्य उपकरण-
इसके अतिरिक्त प्रातः आगामी पैदल चालकों को हाथ में दृष्टि में आने योग्य कोई भी ठोस वस्तु, पदार्थ, पत्थर, लोटा, गिलास, दण्डी इत्यादी होने से होते है कि श्वान हमला करने की संभावनाओं में 50 प्रतिशत तक की कमी हो जाती है.

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