Who is Good, Sharp & Cunning!

यूँ ही पैदल चलते अंतर्मन से वार्तालाप करते, प्रकृति के आगोश में प्राकृतिक रंगों का नैनों से रसास्वादन का लाभ लेते प्रातः क़ालीन पैदल नागरिकों को पार करते अंतर मन से यह प्रश्न उत्पन्न हुआ कि यह सामने से आता यह पुरुष कैसा है ?
प्रत्युत्तर भी तुरंत आया –

अच्छा है !
बेचैन अंतर्मन का प्रतिप्रश्न भी त्वरित उत्पन्न हुआ कि
यह निर्णय तुमने कैसे लिया ?

अंतर्मन में द्वंद जारी था उत्तर फिर आया
आसान है मैं इनसे परिचित नहीं हूँ अतः स्वभाव वश भले-बुरे या नैतिक-अनैतिक की कसौटी पर कस नहीं सकता, आंकलन नहीं कर सकता अतः अच्छे व्यक्ति ही होंगे.

तो भले व्यक्ति कौन होते हैं ?

प्रश्नों की श्रृंखला जारी थी.

जो व्यक्ति आपसे साल दो साल से परिचित हों, साधारण या श्रेष्ठ आचरण के हामी हों, अतिवाद से पीड़ित न हों तो वे भले हैं. भले व्यक्ति अपने आप काम से काम रख है और जीव-दया के मूल तत्व से आलोकित हो सबके सहायक हो दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझ सहायता को तत्पर हों व व्यक्ति भले.

तो भोले व्यक्ति कौन होते हैं ?

अंतर्मन की जिज्ञासा का ज्वालामुखी जारी था.
भोला व्यक्ति भरोसेमंद और प्रकृति के सबसे मूल प्रति होते हैं सभी पर आसानी से विश्वास कर सदैव फटे में पाँव डालने को आगे आने सहायता को तत्पर. तभी तो भोले व्यक्ति आसानी से ठग लिए जाते हैं उनके साथ सरल छल होता रहा था और वे भोले बने रहते हैं कई बार समाज के द्वारा भोले व्यक्ति मूर्ख की श्रेणी में भी रखे जाते हैं जबकि वे प्रकृति के भक्त हो आध्यात्मिक भाव से पीड़ित हो शरणागत हो और वीतराग के पालनकर्ता होते हैं.

तो फिर चतुर और चालाक कौन होते हैं ?

प्रश्नों की शृंखला जारी थी!

चतुर स्वयं को आघात ना लगे ऐसे प्रयासों को शारीरिक और बुद्धि कौशल के साथ स्वयं के बचाव को प्रस्तुत होते हैं. चतुर नागरिक सकारात्मक सोच के धनी हो स्वयं सिद्ध होने के भी हामी होते हैं. चतुर व्यक्ति तो स्वयं के साथ समाज के समग्र हित के विचार रख उसी प्रकार कार्यरत रहते हैं. चतुर व्यक्ति अपने प्रति बैर भाव रखने वाले मनीषियों से भी संतुष्ट हो अपनी बेहतरीन सामाजिक और व्यक्तिगत कार्य करते हैं ताकि उनका अपना आभा मंडल ऊर्जावान रहे उज्ज्वल रहे हैं और उन्नतिशील रहे. दूसरों को हानि न होने पाए चतुर व्यक्ति समस्याओं का सामना सामने से करते हैं और समाधान कुछ इस प्रकार से ढूंढने का प्रयास करते हैं ताकि जिससे समाज का भला हो स्वयं का भला हो और हानि किसी की ना हो.

उत्तर की भी शृंखला जारी थी

तो फिर चालाक कौन होते हैं?

चतुर और चालाक मानस में महीन अंतर है जहाँ चालाक व्यक्तित्व में स्वार्थ का तत्व इतना सर्वोपरि होता है कि स्वयं हित हर क़ीमत पर प्राप्त करने के लिए आसन्न प्रयास किए जाते हैं भले अपनी स्वार्थ रेखा बड़ी करने के लिए दूसरे की सम्मान रेखा छोटी ही क्यों न करना पड़े. चालाक व्यक्ति, पलायनवाद से भी पीड़ित हो सच्चरित्र बने रहते हैं जहाँ आसन्न जोखिम देखा तो मैदान छोड़ देते हैं. चतुर व्यक्तित्व मैदान नहीं छोड़ते हैं तो बुद्धि कौशल दृढ़ इच्छा शक्ति और शरीर सौष्ठव के उपलब्ध मानकों पर विश्वास कर सार्थक प्रयास जारी रखते हैं वहीं चालाक व्यक्तित्व अपने स्वार्थ परक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए प्रयासरत तो रहते ही है प्रतिकूल परिस्थिति को देखकर मौसम को दूर से भाँप कर भाग खड़े होते हैं और अनुकूल परिस्थिति को देख पुनः आ खड़े होते हैं.

और धूर्त व्यक्तित्व
अंतर्मन में उपजे इस प्रश्न का उत्तर जटिल नहीं है परंतु पहचान होने में समय लगता है. भले से बुरे के श्रेणी में इस व्यक्तित्व के धनी सुधीगण अंतिम बिंदु के अधिकारी होते हैं जो एन केन प्रकारेन अपनी स्वार्थ सिद्धि में साम दाम दंड भेद के साथ बल-बुद्धि के द्वारा अनैतिक पालन से कार्य सिद्धि कर गुजरते हैं. यह दुर्लभ मीमांसा है जो अब प्रचुर मात्र में धन पिपासा एयर वासना सिद्धि के विशेष स्नातकोत्तर स्तर के धरोहर भी है

अन्तर्मन हुआ निशब्द.
(विभिन्न श्रेणी के उदाहरण विवेक के आधार पर आंकलन किया जा सकते हैं)

पाठक को असहमत होने का अधिकार है

आदर्शवाद से पीड़ित!

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