पुरातन कथन है कि आनंद में हो तो यात्रा कीजिये, अवसाद में हो तो यात्रा कीजिये, उदासीन हो तो यात्रा कीजिए. देशाटन से ज्ञान बढ़ता है …. का पुराना कथन आज भी प्रासंगिक है और कलयुग के इस दौर में ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा आपको न केवल सोचने के लिए मजबूर कर देती है बल्कि आश्चर्य चकित भी करती है कि आज के परिदृश्य में हमारा सामर्थ्य की तुलना में हमारे पूर्वज कितने बलशाली थे कितने दूर दृष्टा थे तथा छोटे छोटे राज्यों में उनके पराक्रम शौर्य विज्ञान और कला को पोषित करने की उनकी भावनाएँ ईश्वर के द्वारा पृथ्वी की रचना जैसे वृहत्तम कार्य से क़तई कम नहीं है.
भारत के दक्षिण में विजयनगर साम्राज्य की राजधानी हम्पी कर्नाटक में स्थित है और कई बरसों से हम्पी जाने का मन था. इस स्वतंत्रता दिवस पर हम्पी की यात्रा संपन्न हुई. आरंभिक कठिनाइयों और परेशानियों के बाद जब इस अनमोल वैश्विक धरोहर के आंगन में पहुँचे तो ऐसा लगा कि आधुनिक मानव की अनमोल तम रचनाओं में से निस्संदेह एक है हम्पी के भग्नावशेष जो विश्व धरोहर भी हैं.
सदैव उत्तर की ओर देखने कि हमारी लालसा और अभीष्ट आकांक्षाओं के चलते हैं हमारा मानना है कि दक्षिणमुखी होने के पहले झिझकता है पर जब आप भारतीय उप महाद्वीप के इस धरोहर क्षेत्र की यात्रा और धरोहर का अवलोकन करें तो ऐतिहासिक राजवंशों का इतना सुगढ़ और सुदृढ़ दृश्य प्रदर्शित होता है कि दांतों तले उंगली दबाए बिना आप रह नहीं पाते हैं.
यदि आप आश्चर्यचकित होना चाहो
मुदित होना चाहो
गर्वित होना चाहो
आध्यात्मिक होना चाहो
अपने गौरवमय इतिहास से तो दूर नहीं मात्र 500 बरस पूर्व बसे कर्नाटक राज्य में भग्नावेशों के ऐसी श्रृंखला है हम्पी में यूनेस्को द्वारा घोषित विश्व धरोहर है.
लगभग 500 वर्ष पूर्व विजयनगर साम्राज्य अपनी सीमाओं के प्रति इतना सजग, सक्षम व सुदृढ़ था कि पूरी दुनिया की सभ्यताओं के व्यापारी वैज्ञानिक इतिहासकार कलाकार राजा कृष्णदेव राय के राज्य में अपनी ज्ञान सुविधा को तृप्त करने के लिए तो उपस्थित होते ही ते अपनी व्यापारिक व्यास को बजाने का भी प्रयास करते थे सुनने में आश्चर्य लगता है कि विजयनगर साम्राज्य इतना धनाढ्य था कि विरुपाक्ष मंदिर के दोनो और बने बाज़ार की गली में हीरे मोती और अन्य बहुमूल्य पत्थरों का व्यापार है जहाँ सेर के वजन के हिसाब से बर्तनों में भरकर व्यापार होता था जिसके चित्र भी हम्पी संग्रहालय में प्रदर्शित फोटो फ्रेम में प्रकाशित हैं लगभग 4 हज़ार भग्नावशेषों की धरोहर लिए हम्पी अपने आप में पूर्ण रूप से दर्शनीय इकाई है जहाँ वास्तुकला स्थापत्य कला व्यापारिक प्रतिष्ठानों का निर्माण और ईश्वर के प्रति अगाध आस्था का निरंतर प्रदर्शन होता है यहाँ तक की हम्पी क्षेत्र में 4हज़ार से अधिक मन्दिरों की उपस्थिति को सुन आपके मस्तिष्क की विद्युतीय तरंगें लगभग उलझन में पड़ जाती है
विरूपाक्ष मंदिर-
तुंगभद्रा नदी के किनारे बसे इस अनमोल धरोहर के हिस्से में भगवान राम की ज़मीन पर एकमात्र जगह पर रखे हुए दोनों का मंदिर स्थापित है तो वही हाँ जी लिए पर्वत पर भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमान जी की जन्मस्थली भी स्थापित है. विरुपाक्ष मंदिर जो भगवान शिव के आराध्य देव के रूप में कृष्णदेव राय द्वारा १५ वर्षों के अथक प्रयास से बनाया गया है कि गोपुरम याने प्रवेश द्वार की ऊँचाई देखकर विस्मित हुए बिना नहीं रहा जाता है इस गोपुरम प्रवेश द्वार में पत्थरों से उकेरी हुई प्रतिमाओं को इतिहास के विभिन्न पौराणिक और धार्मिक कथानकों से लिया गया है इस शिव मंदिर के प्रांगड़ में एक प्राचीन पोखर भी है जो उस दौर में जल प्रदाय की बेहतरीन व्यवस्था का प्रतीक है. जहाँ आप विरुपाक्ष मंदिर हम्पी का मुख्य आकर्षण है वहीं इस शिव मंदिर के नंदी की मूर्ति की स्थापना भी विस्मित करने योग्य दूरी पर 1 पत्थर से काटकर बनायी गई है विरुपाक्ष मंदिर के सामने लगभग 8 मीटर की दूरी पर नदी देव की विशाल प्रतिमा (२० फीट x १५ फीट) पहाड़ के पत्थरों से काटकर बनायी गई है is नंदी देव की की आकृति को देख आप दंग रह जाते हैं. और आश्चर्य तो तब होता है जब विरुपाक्ष मंदिर और नक़दी देव की मूर्ति के बीच में दोनों और विजयनगर साम्राज्य का मुख्य बाज़ार बनाया गया है जो आज भी स्थापित है जहाँ सभी क़िस्म अनाज, रत्न, जेवर, वस्त्र पशु इत्यादि का व्यापार होता था.
विहंगम दृश्य के मध्य हम्पी प्रशासन ने संग्रहालय में हम्पी के धरोहरों को समुचित रूप से संरक्षित भी किया है जहाँ इस काल के बर्तन, मुद्रा स्टाम्प, चित्र और मूर्तियाँ व्यवस्थित हैं. शिव मंदिर और नंदी देव के मध्य इतनी दूरी देखकर दर्द मिश्रित आश्चर्य उपस्थित होता है जो प्रदर्शित भी करता है कि नंदी देव स्वरूपी भक्त का आकार कितना भी विशाल ही क्यों न हो, ईश्वर की प्राप्त की डगर लंबी है.
हज़ार राम मंदिर पत्थर पर उकेरे गए राम जीवन के प्रसंग जैसे कॉमिक स्ट्रिप हो –
आश्चर्य तो तब होता है जब आप हज़ार राम मंदिर में यात्रा करते हैं और उस मंदिर की प्रस्तर दीवारों पर कॉमिक स्ट्रिप जैसा रामायण की कथानक को पत्थरों पर उकेरा हुआ पाते हैं. इस विशिष्ट मंदिर में कथानक का आरंभ और रघुवंश अयोध्या के राजा श्री दशरथ की सन्तान ना होने पर ऋषि शंक के सम्मुख उपस्थित हो पुत्र वरदान की आशा से उपस्थित होने ke दृश्य से आरंभ होता है जो राम के राज्याभिषेक और समाप्त होता है. कितना भी जोरदार, प्रभावी और असरदार तरीक़े से इन पंक्तियों में यह लिखा जाने का प्रयास किया जाए कि कितना अद्भुत अनुभव है इस मंदिर को देखे जाने का बिना देखे या चित्रों के माध्यम से और गंभीरता और गहराई को समझा ही नहीं जा सकता है. हज़ार राम मंदिर को देखने से प्रतीत होता है कि बिना लेज़र गाइडेड मशीनें हो गए मात्र छैनी हथौड़े की सहायता से मूर्ति कला में पारंगत एक बड़ी संख्या के कारीगर वो ने प्रथम पत्थर से लेकर शीर्ष के अंतिम पत्थर तक कितनी कला को प्रदर्शित किया है जो विस्मित तो करता ही है आपको यह सोचने पर भी मजबूर करता है विवश करता है कि हमारे पूर्वज कितने बलशाली थे, कल्पनाशील थे, सहनशील थे और धैर्यशील भी थे जिन्होंने दशकों तक श्रम करके इन अलौकिक रचनाओं को गढ़ा और रचा.
विजयनगर साम्राज्य की समृद्धता का इस बात से पता लगाया जा सकता है कि पूरे विश्व में कहीं भी कभी भी हाथियों का अस्तबल देखने को नहीं मिलेगा परंतु हम्पी में राव राजा कृष्णदेव राय के राज्याधिकार क्षेत्र में 11 हाथियों के लिए एक विशेष और विशालकाय अस्तबल बनाया गया है जिसको देखते ही आँख फटी रह जाती है कि ये क्या है ? जब पथ प्रदर्शक द्वारा इस हाथियों के अस्तबल की जानकारी प्रस्तुत की जाती है तो आश्चर्य ही होता है कि हाथियों को तैयार करने के लिए 1 विशिष्ट ऊँचाई पर एक पृथक प्लेटफार्म भी निर्मित है जहाँ पर चढ़कर महावत और सहायक हाथियों की सेवा सजावट इत्यादि का कार्य करते थे
विट्ठल मंदिर-
एक अन्य प्रसिद्ध मंदिर का उल्लेख किये बिना हम भी की यात्रा का अनुभव अधूरा ही रहेगा जहाँ जिस मंदिर के विशिष्ट खम्ब संगीत प्रस्तुत करते हैं. म्यूजिकल पिलर से बनाया गया है उस दौर के स्थापत्य कला के निर्मान की अकथनीय गाथा प्रस्तुत करता है. प्राकृतिक संसाधनों से प्रयोग करने की क्षमता लगभग अकल्पनीय है जहाँ इस मंदिर में लगे पत्थरों से को ठोकने से संगीत की विभिन्न ध्वनियां सुनाई पड़ती है. इस प्रकार का कथन मात्र ही आपको विस्मित तो करता ही है, विज्ञान के एक नए आयाम से साक्षात्कार भी कराता है. आज आधुनिकता के दौर में बोहोत सारी अकल्पनीय अविष्कार हमारे आपके देखने में आते हैं परंतु हास्य 5 सौ वर्ष पूर्व जब न बिजली थी ना उच्च श्रेणी के हथियार औज़ार थे तब उस दौर में भी सीमित संसाधनों ke साथ दृढ़ संकल्पित दृष्टिकोण से भविष्य के लिए एक ऐसी अनमोल धरोहर को प्रस्तुत किया है कि देखे बिना मन नहीं भरता इसी मंदिर के हालाँकि इन पत्थरों पर ठोका लगाकर संगीत उत्पन्न करने पे अब पाबंदी है परंतु स्कैनर कोड लगे हैं आपके स्मार्ट मोबाइल फ़ोन से इन पत्थरों के सामने ही स्कैन करके प्रत्येक पत्थर की विशिष्ठ ध्वनि को सुनकर आनंदित हुआ जा सकता है इसी मंदिर के प्रांगण में एक ऐसी रचना स्थापित है जो रथ रूप में है और जिसका न प्रतिकृति भारत सरकार द्वारा जारी 50 रुपया के करेंसी नोट के पीछे अंकित है ऊँचे स्थान पर रथ पर लगे तो ये उस पर लगे रोधक या स्टॉपर को देख राज्य की समृद्धता विद्वता और दृष्टा का भान तो होता ही है आपका हृदय विजयनगर के साम्राज्य की समृद्धता के ऐतिहासिक दृश्य के कल्पना से सराबोर कर देगा जिसकी भूरी भूरी प्रशंसा किए बिना रह नहीं पाएंगे.
अपने सांस्कृतिक धार्मिक आध्यात्मिक संदर्भों के साथ साथ साहसिक पर्यटन के भी समुचित उदाहरण प्रस्तुत करता है न जो युवा वर्ग विशेष के लिए भी एक आकर्षक पर्यटन स्थल या आश्चर्य की बात हो सकती है की साहसिक खेलों के लिए पहाड़ों पर ट्रेकिंग के अनुभव के साथ साथ बोलडेरिंग और तुंगभद्रा नदी और निकटस्थ झीलों में कोरेकल बोटिंग का एक अनुपम अनुभव प्राप्त किया जा सकता है. जैसा कि ज्ज्ञात है कि प्रभु श्रीराम जी के परम भक्त श्री हनुमानजी के जन्मस्थली हम्पी के आंजनेय पर्वत में स्थित है तथा वहाँ तक पहुँचने के लिए ट्रेकिंग मार्ग से जाना होता है. अन्य रमणीक एवं दर्शनीय स्थलों तक पैदल जाने के मार्गों पर साहस, स्वास्थ्य और संकल्प का परिदृश्य का अनुभव उपलब्ध हो जाता है. एक अन्य रोचक गतिविधि कोरेकल-बोटिंग में एक कटोरीनुमा बाँस व बेंत से बनी छोटी बोट में नौकायन का अनुभव उपलब्ध होता है. इस कोरेकल बोट को डामर के द्वारा जलरोधी बनाया जाता है जो बारिश के मौसम को छोड़कर तुंगभद्रा नदी तथा अन्य छोटे झील की जलराशि में बोटिंग का एक अद्वितीय अनुभव प्रदान करती है जहाँ भय , दुस्साहस और सीमित संसाधन की स्थिति के मध्य सीमित गति से जल राशि पर सवारी एक चुनौतीपूर्ण स्थिति को का साक्षात्कार कराती है. बोल्डरिंग एक ऐसा साहसिक खेल है जो मजबूत भुजाओं और अत्यधिक शारीरिक लोच के अधिपति एथलीट, हंपी क्षेत्र में उपस्थित विशालकाय पत्थरों पर चिन्हित निशानों की पकड़ कर चढ़ाने का प्रयास करते हैं जो आमतौर पर सक्षम गाइड के निर्देशन में सुरक्षा उपकरणों के साथ किए जाते हैं. इस प्रकार के अनुभव शारीरिक क्षमता को चुनौती तो देते ही हैं मानसिक दृढ़ता और कार्य पूरा हो जाने पर संतुष्टि की ऐसी अनुपम अनुभूति से सराबोर कर देते हैं कि यह प्रतीत होता है कि यही है यही है यही है जिसे मैं प्राप्त करना चाहता था
वैश्विक धरोहर होने के कारण हम्पी अपने विशाल स्वरूप और अद्वितीय रचनाओं को बेहतर प्रकार से संजो पाया है. यहाँ रात्रि विश्राम की बहुल सम्पदाएँ उपलब्ध हैं जो सभी आर्थिक वर्गों के बजट में शामिल होने योग्य हैं. हम्पी, सुधि जिज्ञासुओं को एक अकल्पनीय तथा अपरिमित अनुभव से साक्षात्कार का अवसर प्रदान करता है और इस संपदा की यात्रा आपके मन में यह दृढ़ विश्वास अवश्य उत्पन्न करती है कि ऐतिहासिक पन्नों में इस भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में वर्णित विश्व गुरु होने का मुकुट अविश्वसनीय नहीं है यह आसानी से हम्पी के ३ दिवसीय यात्रा में प्रदर्शित ही होता है








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