Asking Apologies!

मम उवाच –

अद्भुत है यह क्षमा याचना पर्व का आव्हान जिसे जैन समाज मिक्षामि दुक़्दम नाम से मनाता है

कुछ इस मंगल कार्य से
ज़िंदगी को संवार लिया,
कुछ से क्षमा माँग ली
कुछ को क्षमा कर दिया.

जो क्षमावान होते हैं वे पूर्व से ही कृत्य पालन का होश रखते हैं कि दुष्कृत्य ना होने पाए.
जो क्षमाशील होते हैं वे सदैव स्थिर और शांत हो असत्य, घृणा, द्वेष को पहचान कर भी झुककर सत्य, प्रेम और सद्भाव चुन लेते हैं.

परंतु सदैव ही क्षमा का मार्ग शुचिता को प्रशस्त हो अनिवार्य नहीं. कहीं कहीं लातों के भूत बातों और क्षमा से मानते नहीं.

तो जैसा माथा वैसा तिलक लगाते चलिए,
कुछ को दया तो कहीं दंड दिलाते चलिए.

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