Movie review आप जैसा कोई
फ़िल्मों का संसार समाज का दर्पण होता है और जब वो ही कथानक नए स्वरूप में उपस्थित हो जाए जो समाज के परिवर्तित होते परिदृश्य को प्रस्तुत करता हो तो चलचित्र दर्शन में व्यय किया गया समय एक निवेश की तरह प्रतीत होता है.
नया कथानक, मंजे हुए कलाकार और सोशल मीडिया प्लेटफार्म के प्रभाव से आलोकित यह रोमांटिक और भावप्रण चलचित्र “आप जैसा कोई” ना केवल अपने दर्शकों को बाँध कर रखने में क़ामयाब रहता है बल्कि विचार करने योग्य एक भावात्मक अभिव्यक्ति का सृजन भी करता है. पुरुष प्रधान समाज में जहाँ स्त्रियों की आधी गवाही न माने जाने के भी उद्धरण प्राप्त है वहीं शोषित होते स्त्री के उठ खड़ा होने के उदाहरण भी यदा कदा प्रस्तुत होते हैं. अत्यंत रोचक घटनाक्रम में ऐसा ही कुछ देखने को प्राप्त होता है.
विवाह की प्रक्रियाओं के साथ यह कथानक कुछ इस तरह इतना रोचक बन पड़ा है कि पास पड़ोस की कथा जैसा प्रतीत होता है. स्थापित तथ्य है कि कोई भी विवाह संस्कार बिना ग़लतफ़हमी के संपन्न नहीं हो पाता है वहीं परस्पर आकर्षण और सुधि परिजनों के व्यक्तिगत प्रयासों से अंत भला तो सब भला जैसी स्थितियां भी कथानक को मज़बूत बनाने का प्रयास करती है.
नेटफ़्लिक्स पर उपलब्ध यह कथानक आर. माधवन के परिपक्व अभिनय और फ़ातिमा के अल्हड़ अभिनय से सजा हुआ है जो उम्र के विशेष अंतर को भी भलीभाँति प्रदर्शित करता है. इससे ज़्यादा कुछ न कहते हुए इस प्रस्तुति पर आपकी रुचि और रहस्य को बनाए रखते हुए इस फ़िल्म को देखे जाने की अनुशंसा किए जाने का आग्रह है जो आपको विचार करने पर मजबूर करेगा.

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