अचानक बारिश और हम शिकायती
आज ४ मई को दोपहर १ बजे तक भतेरी गर्मी थी और इंदौर के लाल, लाल हो रहे थे कि इस इंदौर में कितनी गर्मी पड़ रही है इस बरस.
लहजा, शिकायती जैसे पहली बार ही ४०-४२ का तापमान देख रहे हैं.
झुनझुनाता, भुनभुनाता और यूं ही सिर हिलाता लाल पीला होता नागरिक अपने को, पर्यावरण को और ईश्वर को कोसता चला जाता था
कि
आज बदरा घिर आए आसमान में और मौसम बदल गया. पहले तो बूंदा बांदी हुई लगा इतने में थमेगी कि जोरदार बारिश आरम्भ हो गई और सड़कों से वाहन ग़ायब पैदल ग़ायब और सड़कों पर छतों पर पानी ही पानी. तापमान तिस पर अलग गिर गया.
पेड़ पौधे, चिरैया समुदाय की प्रसन्नता तो जैसे देखते ही बनती थी कि ये तो नेचुरल एयर-कंडीशनर लागू हो गया हमारे लिए भी.
परंतु लहजा, शिकायती जैसे ऐसे ही अचानक क्यों दे दी बारिश यत्र तत्र सर्वत्र पानी ही पानी. गोया कि प्रकृतिदेव पहले से बतला देते तो छाता – बरसाती साथ में लेकर निकलते. निष्कर्ष यही कि शिकायती-मोड समाप्त ही नहीं होता है. गर्मी पड़े तो हाय हाय और बारिश हो जाये तो शिकायत यह कि दिन में क्यों करते हो बारिश. रात में १२ बजे के बाद खोलो बादल की टोंटी सुबह ६ बजे बंद. आपका भी काम हो जाये अपना भी जीडीपी सुधार जाये.
पर सुने कौन जो प्रकृति लीला अनिश्चितता से भरपूर है!
बिजली विभाग ने अपने कर्तव्यों की समय पर सजग रहते पूर्ति की और दुर्घटना से बचाव के लिए प्रदाय रोक दिए. वाईफाई बंद हुए परंतु मोबाइल के सस्ते डेटा पर रील दर्शन जारी रहा. रविवार जो है आज.
हवा के तेज दौर-दौरा से विवाह मंडप उड़ गए और संस्कार की प्रकिया, प्रीतिभोज और पानी फिर गया. वर वधू के माँ पिता कभी मेहमानों को देखेते तो कभी आसमान को, कि हे प्रभु मेरे साथ ही क्यों ऐसा हुआ?
सबसे ज़्यादा विपदा तो मेडिकल प्रवेश की नीट परीक्षा के उन केंद्रों पर आई जहाँ बिजली कटौती की स्थिति में वैकल्पिक प्रकाश की कोई व्यवस्था न थी.
कुल मिलाकर ४ मई का अपराह्नकाल शिकायतों, अव्यवस्थाओं और खुले आसमान के नीचे आयोजित विवाह समारोहों के कसैले स्वाद के रंगों से भर गया. वैसे आम के पेड़ों से केरियाँ खूब गिरी और खूब बटोरी गईं.

Leave a comment