PreGym Investigations

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जिम आरम्भ करने से पूर्व क्या जाँच करें?

क्षय रोग यानी ट्यूबरकोलोसिस (टी.बी.) से पीड़ित 13 साल के बच्चे का परीक्षण करते समय पूछ लिया मैंने कि

क्या बनना चाहते हो?
बॉडी बिल्डर! उत्तर आया.
कैसे बनोगे?
जिम जाऊंगा. उत्तर आया.
अचंभित हो गया मैं यह सुनकर क्योंकि मैं आशा कर रहा था कि इस श्रमिक पुत्र का उत्तर आएगा, मै अखाड़े जाऊंगा और सेहत बनाऊंगा.

21 वीं सदी के इस नए दौर में आधुनिकता की दौड़ चल रही है. पहलवानी का नाम बदल गया है. पुराने देशी अखाड़े पानी भरने लगे हैं और बॉडी बिल्डिंग के आधुनिक अखाड़े जिन्हें जिम्नेशियम कहा जाता है, ने पुराने और सिद्ध रूप से स्थापित मिट्टी में कसरत करने वालों को मीलों पीछे छोड़ दिया है.

उचित भी है! समय के साथ चलना आधुनिक मांग है.

आधुनिक अखाड़े यानी जिम की चमचमाती और लकदक मशीनों पर दौड़ने व व्यायाम करने का दौर है तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए. स्वीकार यह भी किया जाए कि जोश-जोश में जिम में व्यायाम करने के आरंभिक दौर में प्राणघातक घटनाक्रम की एक बड़ी श्रृंखला हर व्यक्ति के मानस पटल पर अंकित है. नए उत्साही जिम-साधक नौजवान और अधेड़ प्रतियोगिता और प्रदर्शन के नए मापदंडों के वशीभूत हो अपने शरीर को अधिक से अधिक तनाव में ले आते हैं और परिणामस्वरूप पूर्व से आरामतलब आपका हृदय सहन नहीं कर पाता है और हृदयाघात की स्थिति उत्पन्न हो जाती है.

ऐसे कई उदाहरण प्राप्त है कि ट्रीटमेंट पर दौड़ते-दौड़ते हृदयाघात हुआ और समीप स्थित किसी जानकार ने हृदय को सी.पी.आर. देकर उस मानव जिम-साधक की जान बचाई. कई भाग्यशाली प्राण बचा पाए तो कई जिम में ही काल कवलित हो गए. आखिर जिम में प्रवेश कर पाने से पहले क्या करना चाहिए ताकि शरीर के समुचित परीक्षण उसके बाद ही आप जिम में व्यायाम को तैयार हों….

अनिवार्य जांच –

हीमोग्लोबिन की जांच – सी. बी. सी.
यदि आपके रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी है तो आप जल्दी थकेंगे. तो ऐसी स्थिति में एनीमिया प्रोफाइल जिसमें टी.आई.बी.सी., सीरम फेरेटिन तथा टाइपिंग ऑफ एनीमिया की जांचें सम्मिलित होगी वो कराना एक सुरक्षा मापदंड है. प्राथमिक हीमोग्लोबिन की जांच किसी भी लेबोरेटरी में कराई जा सकती है. इस तरह की जांच किसी भी पैथोलॉजी लैबोरेट्री से कराना उचित रहता है

रक्तचाप की जांच - यदि आपकी आयु के संदर्भ में रक्तचाप के स्थापित मापदंडों से अधिक रक्तचाप अंकित पाया जाता है तो रक्तचाप के कारणों की समीक्षा चिकित्सक द्वारा कराकर ही व्यायाम के नए कार्यक्रम का आरंभ किया जाना चाहिए.

ई सी जी – यह एक ऐसी जांच है जिसमें हृदय की गति, विद्युतकीय स्पंदन, रक्त प्रदाय की प्राथमिक जांच की जाती है जो आपके हृदय के स्वास्थ्य का हाल बताती है कम लागत की यह जांच हर जिम-साधक को जिम में व्यायाम का कार्यक्रम आरंभ करने के पूर्व अवश्य कराना चाहिए.

2-डी इको-कार्डियोग्राफी – यह हृदय की संरचनात्मक त्रुटियों की सोनोग्राफी की जांच है. इसके द्वारा हृदय के वाल्व, मांसपेशी, रक्त-पम्पिंग की शक्ति, पैदाइशी हृदय रोग अथवा ट्यूमर जैसी परिस्थितियों की पहचान की जा सकती है. कई बार हमारे शरीर में कोई असमान्य स्थिति बिना लक्षणों के भी बनी रहती है और हमें पता ही नहीं रहता है. ऐसी स्थिति में जिम में व्यायाम करते समय आसन्न दुर्घटना से बचाव में यह बड़ी परन्तु सुलभ जांच अत्यंत सहायक है.

HbA1C – ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन की विशिष्ट जांच रक्त में प्रवाहित शक्कर के स्तर की जांच है जो पिछले 3 माह के रक्त में प्रवाहित शर्करा का औसत स्तर बताती है. इसके 6.5% से अधिक होने पर मधुमेह का खतरा होता है. जिम-साधक के लिए यह A1c का स्तर ज्ञात करना आवश्यक है.


किडनी की जांच – जिम-साधकों को आरंभिक दौर में किडनी की कार्यप्रणाली से संबंधित प्रारंभिक जांच जैसे सिरम क्रिएटनिन, सीरम यूरिया व ईलेक्ट्रोलाइट्स कराना चाहिए. यदि क्रिएटिनिन यह जांच 1.5 यूनिट से अधिक हो तो ई-जी.एफ.आर. के साथ मूत्र की सामान्य जांच व पेट की सोनोग्राफी की जांच के अगले स्तर तक जाना उचित होता है. इसके साथ रक्त में यूरिया का स्तर और इलेक्ट्रोलाइट के स्तर की भी जांच के माध्यम से किडनी के कार्य प्रणाली का पता चल जाता है

अतिरिक्त जांच –

लीवर की जांच – लीवर के आधारभूत एंजाइम जैसे एस.जी.ओ.टी., एस.जी.पी.टी., एल्कलाइन फॉस्फेटज,एस.जी.जी.टी. व बाइल पिगमेंट के स्तर की जांच ठीक रहती है.

लिपिड प्रोफाइल – शरीर में वसा का विशेष स्थान है जहाँ टोटल कोलेस्ट्रॉल के स्तर से धमनियों की जड़ता का पता चलता है. भिन्न प्रकार की वसा में से हाई डेंसिटी लाइपोप्रोटीन वसा हृदय की अच्छी सेहत का प्रतीक है तथा निरंतर व्यायाम से एचडीएल कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर बना रहता है.

थाइराइड – शरीर के मेटाबॉलिज्म यानी चयापचय की गति के प्रतीक है थायराइड ग्रंथि जिसके माध्यम से विभिन्न चयापचय के हार्मोन का स्राव होता है. इसके हार्मोन के इस तरह की जांच से थायराइड के कार्य करने की गति का पता चलता है.

विटामिन्स एवं मिनरल्स – विभिन्न विटामिन जैसे विटामिन बी-12, विटामिन-डी व मिनरल्स जैसे कैल्शियम के स्तरों की जांच कराई जा सकती है

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