यथा राजा तथा प्रजा
Blog 401
यथा राजा तथा प्रजा की कौटिल्य जनित उक्ति के संदर्भ में भारतीय परिवेश, मानस और परिदृश्य तीनों का आज के संदर्भ में दृष्टि दृश्य और दृष्टा की प्रस्तुति भिन्न प्रतीत होती है. कहने को यह व्यक्तिविशेष के महिमा मंडन का प्रयास प्रदर्शन हो सकता है परंतु यथा राजा तथा प्रजा का चाणक्य- वाक्य आज सच प्रतीत होता है जब मध्यप्रदेश के उत्तर में स्थित श्योपुर जिले की डाँग (जंगल) में दो बरस पूर्व भारत सरकार के विशेष प्रयासों से स्थापित किये गए कुनो चीता पार्क में न केवल अफ़्रीका से लाए हुए कुछ चीतों की बस्ती बसायी गई है और भारत में लगभग सौ साल में पहली बार चीता अपने परिवार में वृद्धि कर पाया है.
गर्मियों के दिन में पानी की कमी और बढ़ती प्यास को देखते हुए वन विभाग के अनुबंधित वाहन के ड्राइवर ने झुंड में चीतों के बैठे हुए एक झुंड को चौबे बर्तन में पानी रखकर पिला दिया.
वीडियो भी वायरल हो फेल गई .यह जाँबाज़ और बहादुर युवक का प्रयास छोटा अवश्य प्रतीत होता है परन्तु असलियत में यथा राजा तथा प्रजा के उदाहरण को स्थापित करता है जहाँ राजा ने अपने भागीरथी प्रयासों से भूमि के एक टुकड़े को चीते का आवास गृह बना दिया. एक बस्ती चीतों की संततियों से स्थापित कर दी वहीं पहले से बसी हुई मानवों की बस्ती ने भी चीतों की उपस्थिति को सहर्ष स्वीकार करते हुए सामाजिक विन्यास में चीतों के पारिस्थितिकीय सामंजस्य को एक उच्च स्तर पर स्थापित करने के लिए एक नए मापदंड को आत्मसात भी किया है
संस्कृत का शब्द यथा राजा तथा प्रजा ने आज सिद्ध किया कि यदि राजा बहादुर हो तो प्रजा भी उस राजा की बहादुरी को स्वीकार करते हुए बहादुर बनती है

बहादुर 💪🏼 राजा
प्रजा बहादुर 💪🏼
Thats really amazing
LikeLike