Be Merry, Get Married.

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मुझे विवाह नहीं करना, पिता को संतान ने सूचना दी.
नहीं करना अथवा अभी नहीं करना… पिता ने प्रश्न किया.
जो चाहे आप समझे पापा. संतान ने रुख अस्पष्ट बने रहने दिया.
दोनों अलग अलग परिस्थितियां है, पिता का स्वर सामाजिक रचना से गुथा हुआ था.

सन्नाटा.

पिता ने गहरी सांस ली और कहना आरंभ किया.

21 वीं सदी में सामाजिक परिस्थितियों में तेजी से बदलाव हुए हैं. फिर भी सनातन परंपरा के 16 अनिवार्य संस्कारों में से विवाह संस्कार सर्वोत्कृष्ट माना गया है. प्रकृति ने भी हार्मोन्स की लंबी श्रृंखला के माध्यम से शारीरिक, मानसिक, पारिवारिक, सामाजिक सरोकारों को स्थापित बनाए रखने के लिए जीवमात्र में एक अर्वाचीन व्यवस्था बनाई है….
सधे शब्दों में पिता पुत्र का एकतरफा संवाद जारी था.

आज के संदर्भ में तुम्हारा करियर सबसे बड़ा उद्देश्य है. शिक्षा किसी प्रीमियम संस्थान से पूर्ण हो, मल्टी-बिलियन डॉलर की कंपनी में नौकरी हो, मल्टी-मिलियन का सैलरी पैकेज हो यह सब अनुचित नहीं है. मेहनत करने का सर्वोत्कृष्ट काल युवावस्था ही है. ऊर्जा उच्चस्तर पर, अनुभव न्यूनस्तर पर तथा सीखने व कार्य पूर्ण करने की ललक व प्रशंसा की भूख का एक औसत स्तर कायम रहता है.

आप कहना क्या चाहते है? पुत्र ने पूछ लिया.

पिता ने कहा – भूमिका बना रहा हूँ कि दोनों में घालमेल न करो.

घालमेल! पुत्र ने प्रश्नवाचक द्रष्टि डाली.

पिता- हाँ, मिक्सिंग यानी करियर और विवाहित जीवन एक साथ चलाये जा सकते हैं, रेल की पटरी की भाँति जिसपर जीवन की रेल दौड़ सकती है. अब पुत्र की आंखें आश्चर्य से चौड़ी हुई.

पिता – आपका भौतिक शरीर और मेटाफिजिकल यानी तात्विक शरीर से तादात्म्य में हैं दोनों एक लय में चलना चाहिए. शरीर, जन्मदिन से प्रतिदिन परिवर्तन के साथ कार्य करता है. अस्थियां, मज्जा, मांसपेशी, हृदय और मस्तिष्क विकसित होते हैं. एक समय पर भावनाओं का प्रादुर्भाव होता है और स्त्रीलिंग व पुर्लिंग एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं. विज्ञान की भाषा में हार्मोन तत्वों के माध्यम से सेकन्डरी यौन लक्षण उपस्थित होते हैं और शरीर के भौतिक व भावनात्मक तत्व, ममता को प्राप्त होते हैं.

यह सब मैं जानता हूँ. पूर्ण वयस्क पुत्र ने कहा.

पिता – तो यह भी जानते होगी कि मानव रूप में जन्म का फिर उद्देश्य क्या है?
पुत्र मौन.

पिता – यह समझना जटिल है. हर जीव मात्र के लिए इस जीवन का अर्थ, उद्देश्य, लक्ष्य भिन्न है. कोई भोग की लीला का हिस्सा बनने को तैयार है तो कोई आध्यात्मिक मार्ग पर चलने को राजी हैं और मोक्ष को हामी है. परंतु समाज की व्यवस्था कुछ इस प्रकार से स्थापित की गई है कि इस मानव के भिन्न प्रजाति, चाहे वो एशियन हो, द्रविड़ियन हो, आर्यन हो, कॉकेशियन हो, अफ्रीकन हो सब एक विवाह संस्कार से अवश्य जुड़ते हैं. भारतीय समाज की लगभग 10,000 पुरानी परम संस्कृति है. भगवान शिव-सती और शिव-पार्वती के विवाह संबंधित दृष्टांत आज भी मुदित करते हैं जबकि यह कोई नहीं जानता कि यह घटनाक्रम कितने सहस्त्र वर्ष पुराना है. सतयुग में भी ऋषि श्वेतकेतु के द्वारा विवाह संस्कार की पुनः स्थापना की साक्ष्य प्राप्त होते हैं जिसमें विवाह संस्कार को उच्च स्तर की सामाजिक व्यवस्था का द्योतक माना जाता है.

यह सब पुरानी बातें हैं, पुत्र ने किला लड़ाया.

पिता – सही कहा. परंतु ये आज भी प्रासंगिक हैं. ओल्ड इज़ गोल्ड तो है ना. अच्छा बताओ, आकर्षण होता है विपरीत लिंग के प्रति या नहीं. पिता ने सीमा लांघी.

पुत्र ने शीश झुकाकर नैतिकता का मान रखा.

पिता – देखो बेटा करियर और परिवार दोनों ही महत्वपूर्ण है आज आप विवाह करने से मना कर रहे हो जब विवाह प्रस्ताव आ रहे हैं. एक समय होगा कि विवाह प्रस्ताव आना बंद होंगे परंतु आयु बढ़ना बंद ना होगी. आपकी पसंद का कोई साथी हो तो बताओ मुझे, अन्यथा जब 35 बरस के हो जाओगे तब कहोगे कि मेरा तो विवाह भी नहीं हो रहा है. पापा आप तो समझदार थे उस समय जब मैं विवाह के लिए मना कर रहा था तब आप मुझे समय पर डांट कर समझा देते तो मैं भी आज परिवार में सदस्य जोड़ लेता.

पुत्र ने सिर झुकाए रखा

पिता ने कमान संभाले रखी और कहा – उत्तर दो पार्थ !

ये सुनते ही पिता-पुत्र दोनों एक दूसरे को देखकर खिलखिलाकर हंस दिए.

थोड़ी देर बाद आखिर पुत्र ने अपना मुँह खोला,

पिताजी मैंने एक लड़की देख रखी है परंतु वह कहती हैं जब एक लाख रुपये प्रतिमाह कमाओगे तब विवाह करेंगे.

पिता ने कहा – चल मुझे उसके घर ले चल होने वाली बहू के माता पिता से बात करते हैं.

दो माह बाद विवाह संपन्न हुआ

2 साल बाद लड़के व लड़की के भाग्य मिलने से मेहनत करने से मासिक वेतन भी मनचाहा प्राप्त हुआ.

संतान रत्न भी प्राप्त हुआ और सामाजिक व्यवस्था भी स्थापित रही.

Union

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