Sick or Health: Simple Measures

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क्यों बीमार होने लगे हैं, हम अब हर आयु में …

डॉ अनिल भदौरिया

आज के आधुनिक दौर में जब विज्ञान के अतिशय विकास से संचार यातायात और विज्ञान के आयाम, “ना भूतो न भविष्यति” के स्तर पर दिखाई पड़ते हैं तो मानव शरीर में आए परिवर्तनों के माध्यम से जीवनशैली रोगों का प्रभाव भी अत्यधिक दिखाई पड़ता है. आज से 50 बरस पहले मधुमेह, उच्च-रक्तचाप मोटापा जैसे रोग, आश्चर्यचकित करने वाली सामाजिक खबर होती थी. वही अब ये रोग छोटे बच्चों तक में भी दिखाई देने लगे हैं जिससे न केवल सामाजिक बल्कि पारिवारिक एवं आर्थिक नकारात्मकता भी प्रभावी रूप से देश की में विकट स्थिति प्रस्तुत कर रही है. आखिर हमारी सामाजिक व्यवस्था कहाँ त्रुटिपूर्ण हो रही है?

आज से 100 बरस पहले पृथ्वी पर सभी पैदावार ऑर्गेनिक या जैविक थी. आज से 100 वर्ष पहले मिटटी, जल, वायु, नभ सब अपने शुद्धतम रूप में थे. संभवतः मानव जाति के लोग भी अपने सबसे स्वस्थ दौर में थे भले ही वैश्विक स्तर पर मानव की औसत आयु कम रही हो परंतु मानव शरीर-रचना अपने सरलतम स्वरुप में थी. फिर व्यवसायिक दौर ने धान की अपूरित लालसा ने दौड़ का रूप धरा और संकर जाति की फसल से पैदावार बढ़ाने का आग्रह प्रदर्शित हुआ, परिलक्षित हुआ, प्रमाणित हुआ, पल्लवित हुआ और इस प्रकार से फलाफूला कि अब फूल-फल, सब्जी, अनाज, तेज रासायनिक खाद और कीटनाशकों के कारण दूषित है. वायु जैसी वृहद कमॉडिटी भी शुद्धतः प्रदुषित हो चुकी है. 100 बरस पहले संक्रामक रोगों का ज़ोर था और 70% मौतें संक्रमण से ही हो जाती थी. सुविधाएं कम होने से गर्भवती माँ, नवजात शिशु और एक बरस से कम उम्र में जान गवां देने के प्रतिशत अत्यधिक थे. अब दृश्य भिन्न हो चुका है.

संक्रामक रोगों के प्रभावी नियंत्रण से जीवन की औसत आयु बेहतर हो गई है परंतु जीवन-शैली में जिस विकृति का पदार्पण हुआ है उससे मधुमेह, उच्च-रक्तचाप, मोटापा और कई प्रकार के कैंसर जैसे रोगों की आवृत्ति अत्यधिक बढ़ गयी है. मानव शरीर एक उत्पादन यूनिट या फैक्टरी की भांति कार्य करता है जहाँ कच्चा-माल यानी भोजन डाला जाता है और सही प्रोसेसिंग के बाद उत्तम उत्पादकता प्रदान की जाती है ताकि आप शुद्ध रूप में जीवन यापन कर सकें.

मेहनती मजदूर था मानव उस दौर में जब पैदल चलना आवागमन के सरलतम ओर लगभग एकमात्र माध्यम थे. गांव से तहसील या टप्पा या कस्बा तक पैदल ही जाना और वापस आना एक स्थापित दैनिक प्रक्रिया थी. स्वाभाविक रूप से ऐसे सरल व्यायाम से निरंतर पसीना रिसता था और शरीर नामक फैक्टरी में उत्पादित विषैले पदार्थों का निकास निरंतर होता था. ग्रामीण परिद्रश्य की देशी जीवनशैली में शारीरिक श्रम के साथ साथ मोटे अनाज के सेवन का समावेश और शुद्ध पर्यावरण के घटक सामान्य रूप से सभी को उपलब्ध थे. इससे उच्चकोटि मानव शरीर रचना को सदैव सवस्थ बनाए रखने में सहायता मिलती थी. आज भी ग्राम्य परिवेश में धूप की पर्याप्त प्राप्ति, लगभग अप्रदूषित वायु का सेवन, कुएं का परिष्कृत पानी और घर के मोटे अनाज का सेवन किसानी परिवार को जीवनशैली रोगों से रक्षा करने में सहायक है. जीवन शैली के प्रभावी नियंत्रण में आज भी देशी जीवनशैली रोगों से बचने और रोग हो जाए तो उनके नियंत्रण में अत्यंत सहायक है.

आइये समझते हैं कैसे ?


मोटापा – यदि थायराइड अथवा वसा संबंधी मानक स्तर में गड़बड़ी न हो तो भोजन शैली में परिवर्तन तथा प्रतिदिन 90 मिनट के लगातार एक बार में पैदल चलने मात्र से ही शरीर में उपस्थित अतिरिक्त वसा का गलना आरंभ हो जाता है. पर्याप्त जल सेवन (लगभग ढ़ाई लीटर), लवण यानी नमक का न्यूनतम सेवन, शर्करा का नितांत परित्याग निश्चित तौर पर शरीर को लोच को बनाए रखने में सहायक है. इसी प्रकार लिवर में स्थित अतिरिक्त शर्करा जब जल जाए तो वसा के स्रोतों को ऊर्जा प्राप्ति के लिए आगे लाया जाता है. वसा का टूटना ऊर्जा के लिए तब आवश्यक होता है तो स्वाभाविक रूप से मोटापा घटने लगता है. बस यह परिश्रम का कार्य है तो प्रतिदिन 90 मिनट का अनिवार्य व्यायाम चाहे वह पानी में तैरने जैसा हो, पैदल चलने जैसा हो, कुछ फील्ड गेम या कोर्ट गेम, आउटडोर-इंडोर हो, दौड़ना हो या श्रम का कोई भी उपाय हो. मैराथन जो कि 42 किलोमीटर लंबी दौड़ होती है, के धावक या होटल के वेटर को हमने कभी अतिरिक्त वसा के साथ मोटा नहीं देखा है. उसका कारण यह है कि वे लगातार अपने रक्त में बहने वाली शर्करा खर्च करते रहते हैं और अतिरिक्त शर्करा, वसा के रूप में एकत्र नहीं होने पाती है.

मधुमेह – एक ऐसा रोग है जो हो जाए तो हार्मोन की कमी दूर करने के लिए औषधि, भोजन नियंत्रण और व्यापार पर निर्भर होना ही पड़ता है. मधुमेह का नियंत्रण ही संभव है जड़ से उपचार संभव नहीं. समाचार पत्रों में ऐसी बीमारियों के जड़ से उन्मूलन के विज्ञापनों से सुधि -गणों को बचना चाहिए. मधुमेह के प्रभावी नियंत्रण में व्यायाम अत्यंत प्रभावी है. प्रातःकाल में लगभग 45 मिनट के पैदल चलने के सरल व्यायाम के पालन करने मात्र से शरीर में उपस्थित अतिरिक्त शर्करा खर्च होती जाती है. इंसुलिन की उपस्थित अल्प मात्रा भी प्रचुर प्रभाव के साथ मांसपेशियों एवं अन्य समस्त उत्तकों को उपलब्ध होने होती है.

न्यूनतम नमक(6 ग्राम प्रतिदिन से अधिक नहीं), शक्कर का त्याग और वसा यानी तेल में तले बाजारी पदार्थों का न्यूनतम उपयोग से इन रोगों में नियंत्रण अच्छा होता है. साथ में प्रोटीन की अधिक मात्रा का सेवन के जैसे जटिल उपायों से मधुमेह का नियंत्रण संभव है. परंतु प्रभावी और लगभग स्थायी नियंत्रण करने के लिए मधुमेह रोग में प्रशिक्षित चिकित्सक द्वारा लिखित औषधियों के साथ नियमित व्यायाम अनिवार्य है. मधुमेह के उपचार में 365 के 365 दिन संतुलित भोजन, नियमित दैनिक व्यायाम तथा बिना भूले मधुमेह नियंत्रक औषधि सेवन से शारीरिक जटिलता रहित लंबी आयु प्राप्त की जा सकती है. मधुमेह से पीड़ित दिव्यांगजन जो पैदल चलने और तैरने में असमर्थ हों, उन्हें योग-आसनों के प्रयासों के माध्यम से 60 मिनट तक विभिन्न यौगिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शरीर को मजबूत बनाने के प्रयास करना की सलाह दी जाती है.

रक्तचाप – यह ऐसा जीवनशैली रोग है. इस रोग का निदान आम तौर पर दुर्घटनावश होता है. इसके लक्षणों को पहचानने में देर लगती है और उच्च स्तर पर रिकॉर्ड किया जाने वाला ब्लडप्रेशर आम तौर पर नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों में पता पड़ता है. इस रोग के कारण वाहिनियों में जड़ता आ जाती है जिससे रक्त प्रवाह को अत्यधिक प्रतिरोध सहन करना पड़ता है तो हृदय को अधिक मेहनत करना होती है और रक्तचाप बढ़ जाता है. प्रशिक्षित चिकित्सक के माध्यम से उचित औषधियों के सेवन के साथ साथ नियमित तथा दैनिक रूप से सरल व्यायाम किए जाने की ओर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए ताकि तनाव, अवसाद, मानसिक- चिंता इत्यादि के कारणों से बढ़ने वाला ब्लडप्रेशर साधारण व्यायाम से पसीने के माध्यम से शरीर में उपस्थित सोडियम नामक अनिवार्य घटक का कुछ अंश का हास कर सकें ताकि रक्त वाहिनियों की जड़ता में थोड़ी शिथिलता आ सके. इन उपायों से उच्च-रक्तचाप जैसे जीवनशैली रोग पर औषधियों के साथ प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है. उच्च रक्तचाप के रोगियों को जटिल और बहुत व्यायाम ना करने की सलाह दी जाती है. जिम में व्यायाम, लम्बी लगातार दौड़, वेट-लिफ्टिंग और अत्यधिक कार्डियो जैसे व्यायाम के माध्यम से हृदय पर अधिक दबाव पड़ता है और जिससे शारीरिक परेशानी बढ़ने की संभावना होती है इसलिए उच्च रक्तचाप के रोगियों को संतुलित, सरल और सुगम व्यायाम करने का प्रयास करना चाहिए जो कम से कम 45 मिनट से अधिकतम 60 मिनट तक के हो सकते हैं.

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