Car Saga

CAR SAGA-


पिछले 100 वर्षों से कार के प्रति प्रेम स्नेह लोभ मोह ने एक अभिनव यात्रा तय की है जिसे शब्दों में गणपा ना गढ़ पाना कठिन है चार पहियों पर कार का विज्ञान धन तंत्र और मंत्र तंत्र दोनों पर घात प्रति कहा तका सुंदर परिचायक है यूँ तो लो फ्लोर, एसयूवी, सिडान, हैचबैक जैसी विभिन्न उत्पाद श्रेणी से पहचाने जाने वाली ये सड़कों की रानी मानव मन को उत्साह उमंग और ऊर्जा से भर्ती चलती है तेल या बैटरी या सूरज के प्रकाश से धमनी कमी होती ये धातु निर्मित वाहन मानव के आवागमन के जीवन की प्राण वायु से कम नहीं 800 मिलीलीटर के इंजिन की ताकत से लेकर 4000 मिलीलीटर की क्षमता की शक्तिमान इंजन के द्वारा कार का हृदय शरीर को एक दिशा में 150 से 200 किलोमीटर प्रति घंटा की गति तक धकेलने में सक्षम है जो सुरक्षित और स्थानांतरण का है.

वैसे भी ऊर्जा का कथन है कि ऊर्जा न तो उत्पन्न होती है और न ही नष्ट वह तो बस स्थानांतरित ही होती है जैसे सूर्य में उत्पन्न ऊर्जा पृथ्वी पर उष्मा और प्रकाश रूप में स्थानांतरित होती जाती है. कार में लगी ऊर्जा वहाँ को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर देती है भले ही वह निम्नस्तरीय कार का ब्रैंड हो अथवा कुलीन हिस्टरी उच्च ब्राण्ड, भाषा और पहिया के पहिये के आविष्कार ने इस पृथ्वी पर मानव जीवन और उसकी शैली में आमूलचूल परिवर्तन स्थापित किया है भाषा से विचार तो पहिये से जन धन माल का स्थानांतरण स्वयंसिद्ध है फिएट एंबेसेडर के प्राचीन दौर से अंतरित होते हुए एम पाला कैडिलक के कुलीन दौर में भारत के दिल्ली बम्बई नगरो में बढ़ी रौनक रही परंतु सीमित भी वही तक रही तो और बदलता रहा और 80 के दशक में जापानी सुजुकी की कार और पर्सनल कंप्यूटर का प्रादुर्भाव लगभग एक साथी हुआ फिर तो भारत ने पलटकर देखा नहीं और तेज गति से उच्च आर्थिक दर की स्थापना हुई इस दौरान ने भारत को आधुनिक बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और भारत ने व्यवसाय के व्यक्ति वैश्विक मापदंड स्थापित किये हैं लखपति तो ठीक सैकड़ों की संख्या में खरबपति व्यवसायी भी अपनी मेहनत दूरदृष्टि जम शीलता के कारण बने जिन्होंने दुनिया की प्रसिद्ध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर भारतीय होने का ठप्पा लगाकर अधिग्रहण भी किया दुनिया के नामचीन कार ब्रांडी भारत को बाजार के रूप में देखने लगे और तदोपरांत टोयोटा होंडा मर्सिडीस बीएमडब्ल्यू फोर्ड चिप जैसे कुलीन और उच्च स्तरीय मूल्य के कार ब्रैंड भी जैसे दौड़ पड़े और भारतीय समाज ने भी इन्हें खुले मन से स्वीकार भी किया.

कहा जाता है के प्राचीन काल से ही भारत सोने की चिड़िया था जहाँ नदियों की संख्या और मानसून की निरंतरता से देव भूमि भारत की मुर्दा सदैव पानी से उर्वर बनी रही भोजन की कमी यार अल पता नहीं रही घरों में खेती का अनाज और थोड़ा सोना सदैव संरक्षित रहा अंग्रेजों के 200 वर्षों के काल की लूट से इसी भारत की लूट से ब्रिटिश राजधानी हो गया 21 वीं सदी के पूर्वानुमान दौर में भारतीय समाज ने दोनों पार्जन के नए उपायों का सृजन तो किया ही धन व्यय करना भी सीखा वीआय की इजक के जाल को तोड़कर भारत अब सृजन और उचित पीएन का समुचित संतुलन स्थापित कर चुका है कार के प्रोफाइल में भी यही स्थापित हुआ है 60 के दशक में जहाँ साइकिल भी लग्जरी का परिचय थी तो 7080 के दशक में बुलेट प्रयास चेतक राजदूत जैसे दोपहिया वाहनों का स्वामित्व गर्व का विषय परिवारों में होता रहा वहीं समय बीतते बीतते अब ऑडी हुंडाई फॉक्सवैगन के साथ साथ फ़ेरारी लिमोसिन वॉल्वो जैसी अंतरराष्ट्रीय उत्पाद भारत की सड़कों की रोमांचक धरोहर बन चूके हैं


धातु रचना में इंजन गियरबॉक्स इंडिकेटर और सपाट सीटों के 80 के दौर से आज कारों का हर पहलू बदल चुका है पर्यावरण ई तथा सुरक्षा कारणों को दृष्टिगत रखते हुए नियामक संस्थाओं ने कार वाहन की संरचना में आधुनिक परिवर्तन प्रस्तुत करने में सहयोग दिया है दमदार इंजन मजबूत चेचिस और मेटल बॉडी के साथ सीट बेल्ट एयरबैग ज़ तथा कृत्रिम बौद्धिकता के चलते कार एवं कार सवार दोनों की सुरक्षा कई गुना बढ़ गई है कार चालन में भी चालक के लिए श्रमसाध्य परिवर्तन हुए हैं जैसे पावर ब्रेकिंग पावर स्टीयरिंग पावर विंडो से लड़ विल्स इन्टीरीअर तथा ओपन तो रूफ के अत्याधुनिक समावेशन से कार उद्योग में एक नवीन इंजीनियरिंग कर आनति ही आ गई है क्रान्ति ही आ गई आज भी निरंतर परिवर्तन किए जा रहे हैं जहाँ आप चालक विहीन कार का सिद्धांत भी मैदानी स्तर पर उपलब्ध हो गया है कार पार्किंग की समस्या को इस प्रकार से कैमरा लगाकर आसान बना दिया गया है की बिना हानि के नौसिखिया भीकम उपलब्ध जगह में पार्किंग कर सकता है मैन्युअल गियर के दौर से आगे बढ़कर ऑटोमैटिक गियर के कार दौड़ के परिचालन से गति सुरक्षा और सुविधा का प्रभाव भी पड़ गया है

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