React or Respond!(375)

असत्या- कैसे मुस्कुरा लेते है आप विपरीत परिस्थिति में भी?

सत्या- आसान है.

असत्या- कैसे?

सत्या- कई बरसों से अभ्यास किया है.

असत्या- अरे?

सत्या- हाँ.

असत्या- बताओ तो?

सत्या- जब भी नकारात्मक विचार आए मुस्कुराइए!

असत्या- वो कैसे संभव है?

सत्या- यही परीक्षा है. जब भी बुरा सोचें मुस्कुराइए!

असत्या- क्यों?

सत्या- क्यूंकि आप सज्जन हैं इसलिए

असत्या- तो विचार जो उत्पन्न हुआ है उसका क्या करें

सत्या- सत्य तो यह है कि विचार शून्य हुआ जा नहीं सकता है परंतु विचार की दिशा बदली जा सकती है. विचार की उत्पत्ति कर्म का हिस्सा है जब आप के लिए कोई अच्छा या बुरा सोचता है. तो बुरे विचार के प्रति आपका विचार भी बुरा उत्पन्न होगा जो साधारण प्रतिक्रिया है. प्रतिक्रिया घातक है जो स्वरूप ले ले. प्रतिक्रिया को बदला जा सकता है एक क्षण को रुक लें तो प्रतिवचन का बुरा स्वाद ख़ुद को अच्छा नहीं लगेगा. इसलिए मात्र मुखड़े पर ही मुस्कुराहट धारण न करते हुए हृदय में भी मुस्कान की स्थापना हो. यह सब संभव है जो अभ्यास से प्राप्त होता है. सत्य तो सतह तक उभर ही आता है चाहे जितना समय लगे. इसलिए मुस्कुराइए…

असत्या- सही है यार.

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