मेरी और तेरी मार्केटिंग….
(टेली मार्केटिंग का दो सुधिगणों के मध्य का संवाद)
हेल्लो,
जी बोलिए,
जी मैं एबीसी बैंक से शीतल बोल रही हूँ….आपको क्रेडिट कार्ड देने के लिए फोन किया था.
थैंक यु , बेटा मेरी कोई रूचि नहीं है.
सर, इस कार्ड के बहुत फायदे है.
जी, मैडम, फायदे तो मरने के भी बहुत हैं, लेकिन कोई मरना नहीं चाहता है.
जी सर.
जी हाँ.
सर , मैं समझी नहीं, भला मरने के क्या फायदे हो सकते हैं…
जीना नहीं पड़ता, मरने के बाद.
ये क्या बात हुई सर, ईश्वर की अनुपम और अनमोल कृति हैं हम, जीने से क्या डर….
शीतल भी मार्केटिंग के मूल सिद्धांत को पकडे, बातचीत को जारी रखे थी .
जीने से डर नहीं, बेटा जीने का मोह, एक जटिल अवस्था है. उससे डर है
जब जीवन है तो मोह तो होगा ही….
मोह जीने का, जीने तक ही संयमित रहे तो उत्तम है, वह अनजाने में ही माया–मोह में कुसुमित हो पल्लवित हो जाता है.
उससे क्या सर?
माया महा ठगिनी है ! माया का मोह ९ रस और ८ भाव से आत्मा, शरीर, स्थूल मन, सूक्ष्म मन सबको मलिन कर देता है.
ऐसा तो कभी सुना नहीं सर !
तो अब सुन लो….श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र,वीर, भयानक, वीभत्स , अद्भुत , शांत ये ९ रस हैं…और प्रेम , उत्साह, शोक, ह्यास , विस्मया ,भय, जुगुप्सा, क्रोध ८ भाव है. आप इन्हें अंग्रेजी में कुछ और कह सकते हैं. जीवन इन्ही रस भाव में माया लीन है.
और खुलासा कीजिये आदरणीय,
चलो मैं तुम्हें आसान भाषा में समझाता हूँ…
जीवन कंप्यूटर है. इसमें मॉनिटर , सी.पी.यु., ऑपरेटिंग सिस्टम, उर्जा प्रवाह, मदर बोर्ड तो है ही, वायरस के लिए भी भरपूर स्थान है. मानव शरीर में वायरस से लड़ने के लिए एंटीबाडी भी हैं फिर भी लोभ, मोह, तृष्णा, वितृष्णा ,काम – वासना , ईर्ष्या,दुःख, हास्य जैसे कई एप्प पहले से ही अपलोडेड हैं जो समय समय पर अपग्रेड होते रहते है……
अरे वाह, ये तो बड़ी अच्छे बानगी हुई, परन्तु इन सबका मृत्यु से क्या सम्बन्ध है.
गहरा सम्बन्ध है, कंप्यूटर में लोडेड फाइल , एप्प , फोटो , डाक्यूमेंट्स आदि डिलीट कर री- साइकिल बिन में डाल देते हो कि नहीं. हाँ …. न..यही री-साइकिल बिन कभी कभी खाली भी कर देते हो. बोलो हाँ.
हाँ.
वैसे ही जीवन में भी जन्म मृत्यु के भ्रमण का चक्र है, जो स्थायी रूप से डिलीट कर देने को मोक्ष की संज्ञा देता है.
ये सब कहाँ लिखा है जो आप इतनी सत्यता से बता रहे है,
गरुण पुराण में.
वह क्या है?
एक आदि ग्रन्थ है . वेद, श्रीमद भगवद गीता, उपनिषद आदि की भांति…..
तो मौत के फायदे क्या हुए,
कुछ नहीं !
आपने ही तो कहा था…
अरे , बिटिया रानी, मैंने कहा था कि फायदे तो मौत के भी बहुत हैं परन्तु कोई मरना नहीं चाहता है. चाहे जितना कष्ट हो, आयु हो, ईश्वर के बुलावे का इन्तेजार करता है मनुष्य. क्रेडिट कार्ड के फायदे बहुत हैं तुम्हारे, फिर भी ऊँची ब्याज दर के बाद ……यह मुनाफे का सौदा नहीं रह जाता है. समझे, बेटा लाल की नहीं…
देह्धारे को दंड है, सब कहू को होय..
ज्ञान भुगतें ज्ञान सों,मुर्ख भुगतें रोय…..
चलो, अब काम करो अपना, और मुझे भी मरने दो… याने जीने दो.. ओह… काम करने दो.
थैंक यु सर, आपसे बात करके अच्छा लगा.
…और मैं भी जीवन की आप धापी भरी दौड़ में फिर लीन हो गया.


Haha क्या खूब लिखा आपने 🙏👍 हास्य के साथ व्यंग
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