Happy Me…(Blog-356)

……यूं खुश हो लेता हूँ मैं.

कड़ी दौड़ ज़िन्दगी की है रोज,
हारता कभी तो जीतता कभी,
बहती हवा को सूंघ दिल से,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


थकता हूँ ,फिट होता खड़ा,
मन को समझा लेता हूँ,.
उगते सूरज को देखकर,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


खाता हूँ धोखा बारंबार
विश्वास करना छोड़ता नहीं,
बरसती बूंदों का त्याग देख,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


चढ़ता सीढ़ी सदा छोटी छोटी,
मंजिल पर निगाह रखता,
जीवन संघर्ष का नाम, ये सोच,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


लिखता सुंदर और ख़राब कभी,
प्रयास छोड़ता नहीं मैं,
खाली होगा मेरा भी आसमान,
सोच यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


मां पिता और परिवार है एकसार,
सेवा सबकी करता चलता,
आशीर्वाद इनका जो मिला तो,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


मिट्टी, भारत की अनमोल थाती है,
कृतज्ञ हो फर्ज निभा लेता हूँ मैं,
ये जन्म उसका आशीष, जान
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


नर सेवा नारायण सेवा का मन्त्र,
धार्मिक भाव का पालन करता,
कर्म ही मेरा धर्म जान,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


भरी दुनिया में चंद सार्थक मित्र,
दुश्मन को भूलता चलता हूँ,
चाँद को तारों के संग देख,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


माया का संसार अपार जान,
धीरज को पतवार बना,
ओस की बूंदों से प्यास अपनी बुझा,
यूं खुश हो लेता हूँ मैं.


रब की तलाश में दौड़ते,
अचरज बेमानी पैदा करते,
‘मैं ही ईश्वर’ का भाव जगा,
यूं खुश हो लेता हं मैं.

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