Little Mosquito

मच्छर को रोको, यही है उपाय.

….. एक छोटा सा ड्रोन नुमा … इतना छोटा कि जो आंखों से नजर ना आए…. दिखाई ना पड़े बिन बुलाया मेहमान हमारे किले जैसे घर में घुस जाता है…. भंवरे की तरह कान में चुनौती देता है …..कहता है रोक सके तो रोक लो…… और ज्यादा ऊंची उड़ान भी नहीं भरता है.

…..यह है आपका घर में बिन बुलाया मेहमान जो बीमारियों से आपको ग्रसित करने में आपके पूरे विज्ञान, ज्ञान, टेक्नोलॉजी को चुनौती देता है. यह छोटा सा मच्छर जिसे आप टाइगर मॉस्किटो या एडिस मच्छर के नाम से जानते हैं हमारे घरों में हमारे समाज में आज डेंगू जैसे खतरनाक जानलेवा बुखार से बच्चों वयस्कों वृद्धों और महिलाओं पुरुषों को एक समान ग्रसित कर रहा है. स्वास्थ्य अमला अपनी पूरी ताकत लगाये है ….परन्तु नाकाम है. चिकित्सा सेवाएं अपनी पूरी ताकत लगाकर डेंगू के रोगियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं लेकिन यह पिद्दू सा नराधम, हमारे घरों में कब्जा किए हुए हैं.


यह छोटा सा मच्छर जिसकी उड़ान घुटनों से ऊपर तक हमारे नहीं आ पाती है वह हमारे कान में रात को या दिन में भिन्न-भिन्न की आवाज़ पैदा करते हुए चुनौती देता है कि रोक सके तो रोक लो और अपने अंदर विषाणु लिए फिरता है मौका ढूंढ़ताहै और चुनौती देकर दिन में काट लेता है. हमारे रक्त में अपनी लार डाल कर ये रक्त के थक्के को बनने से रोकता है. मानव रक्त की आवश्यकता इस मच्छर को अपने अंडे पालने के लिए प्रोटीन की जरूरत होती है जो उसे हमारे रक्त से मिलता है और अपनी लार यह हमारे रक्त में मिला देता है और वायरस हमारे शरीर में जाते हैं जो बहुत तेज गति से शरीर में द्विगुणित होते हैं और मजबूत से मजबूत व्यक्ति को भी वायरल फीवर या डेंगू / डेंगी या ब्रेकबोन फीवर के नाम से जाने वाले इस रोग से ग्रसित कर देते हैं.

मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस रोग से बचा जा सकता है. बहुत सारी चीजें हम जानते हैं जैसे मच्छर अपने अंडे रुके हुए ताज़े पानी में देता है जो हमारे घरों के कूलर या मटके या कुले में पड़े बर्तन / टायर के टुकड़े / पक्षियों के पीने के पानी के पॉट में जमा हो जाते हैं और फ्रेश वाटर या ताजे पानी में यह अपने अंडे देते हैं और यहीं से पनप कर डेंगू जैसा जानलेवा बीमारी पैदा करते हैं.

पिछले एक से डेढ़ दशक से डेंगू रोग ने मलेरिया की संक्रामक आवृत्ति को मात दे दी है और इस कारण डेंगू उत्तर भारत के क्षेत्रों में एक जानलेवा बीमारी का सबसे बड़ा कारण बन गया है.


घर में इन मच्छर से बचाव के लिए प्रत्येक सप्ताह के एक निश्चित दिन जैसे रविवार को घर के सभी कूलर, गमले, बर्तन, छत आदि स्थानों पर हुए पानी का निस्तारण कर दें. घर के आस पास एक चक्कर लगा कर ऐसी जगह पहचाने जहाँ पानी के एकत्र होने की सम्भावना हो. ऐसे स्थान पर मिटटी डालकर समाप्त करना उत्तम होता हिया. इसके अतिरिक्त यदि कोई बड़ी जलराशि घर के पार हो तो उसकी स्वच्छता के लिए ग्राम पंचायत या नगर पालिका का सहयोग लें. एक विशेष प्रकार की मछली तालाब के पानी में डाल सकते है जिससे मच्छर के लार्वा समाप्त हो जाते है.


इसके अतिरिक्त घर में मच्छर का प्रवेश कम से कम हो इस हेतु खिड़की और दरवाजे में मच्छर जाली लगाना डेंगू या मच्छर काटने से होने वाले रोगों के उपचार से कम खर्चीला है. और मच्छर जाली एक बार होने वाला खर्च ही है. यदि मच्छर जाली खिड़की दरवाजे में लगा पाना संभव न हो तो मच्छरदानी हो एक मात्र सुविधाजनक उपाय है जिससे आप रात्रि या दोपहर में मच्छर काटने से बच सकते है. बच्चो को आम तौर पर खेलने के समय मच्छरों को दूर भागने वाली क्रीम लगाना उचित होता है. वाष्पीकरण द्वारा बिजली से उपयोग में लाने वाली केमिकल डिब्बी का प्रयोग सोच समझ कर करना चाहिए. आखिर हैं तो ये रासायनिक तत्व ही.


डेंगू रोग के लक्षण पहचानना जरुरी है ताकि आप अपने चिकित्सक से समय पर मिल सके. हालाँकि खून की जांच से रोग के कारक तत्व यानि वायरस की पहचान नहीं हो पाती है फिर भी कुछ अन्य जांचों से डेंगू की निदान होता है. डेंगी के साधारण लक्षणों में तेज बुखार के साथ सरदर्द, बदन दर्द, जोड़ दर्द, मांसपेशी में खिंचाव के साथ साथ अन्य लक्षण जैसे नाक का बहना और नींद न आना भी लक्षण हो सकते है. चमड़ी पर चकत्ते होना, घबराहट, वमन होना भी हो सकता है.ऐसी स्थिति महसूस हो तो अपने प्रशिक्षित एलोपथिक चिकित्सक से मिलना चाहिए. घातक स्थिति उत्पन्न होने तक रुकना नहीं चाहिए.

बुखार के अधिक समय तक बने रहने पर रक्त का थक्का ज़माने वाली प्लेटलेट्स की कमी होने से रक्त स्त्राव होने की संभावना भी हो जाती है. ऐसी स्थिति में जान को बड़ा खतरा हो जाता है. इसलिए नियमित रूप से बुखार बने रहने की अवस्था में निरंतर कम्पलीट ब्लड काउंट (CBC) कराया जाना अनिवार्य हो जाता है. कई बार रोगी और रिश्तेदारों को लगता है कि इतनी जांच क्यों करायी जा रही है? आपके चिकित्सक को प्लेटलेट की संख्या से जानकारी मिलती रहती है कि आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता का क्या स्तर बना हुआ है.


कई बार देखा गया है कि कतिपय अन्य पैथी के चिकित्सक भी डेंगू के इलाज में ऐसी अलोपेथिक दवाई का प्रयोग कर बैठते हैं जो आराम तो तुरंत कर देती है किन्तु शरीर के रोगों से लड़ने की ताकत को कम कर देती है. ऐसी अलोपेथिक औषधि का प्रयोग सिर्फ जानलेवा स्थिति उत्पन्न हो तब ऐसी परिस्थिति के लिए बचाए रखना चाहिए.

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