Sincere, Who? Me!


एक विवाह समारोह में जूने पुराने मित्र मिल गए औपचारिक वार्ता के बाद पूछ बैठे डॉक्टर साहब कहां पोस्टिंग है आपकी?

बता दिया मैंने यही पास में 40 किलोमीटर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र वहां पदस्थ हूं…

तो अनायास उनके प्रश्नों से चौक गया मैं जब उन्होंने पूछा….. रोज जाना पड़ता है क्या ?

मैं अवाक रह गया, सोचता रहा कि क्या उत्तर दूं!

इस महान सेवाधर्मी डॉक्टरी पेशे को व्यवसाय हम चिकित्सकों नहीं बना दिया है. शासकीय सेवा में रहते हुए भी अपने निजी कार्यालय से लाभार्जन करते रहो और सरकारी अस्पताल के हितग्राही मरीजों को डॉक्टर की अनुपस्थिति में नर्स या फार्मेसिस्ट से औषधि सलाह उपचार मिलता रहे।

मैं मूक खड़ा रहा फिर खुद ही बोल पड़े, यह सोच कर कि कहीं उनकी स्वयं की बेज्जती इस डॉक्टर के हाथों ना हो जाए बोले…
वैसे आप तो प्रतिदिन ही जाते होंगे !

मैं भी बोल दिया, हां सर मेरे पुण्य कर्म कम है और पाप कर्म ज्यादा है ना तो रोज ही चला जाता हूं कुछ पुण्य कर्म कमाने …

मेरे यह वरिष्ठ चिकित्सक एकदम शांत हो भोजन के लिए बिना बोले आगे बढ़ गए.

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑