Seasonal Fruits Are Medicines.

भारत की ऋतुएं और ऋतु फल….

 

भारतवर्ष में होने वाली छह ऋतु के विन्यास से प्रकृति ने फलों का उत्पादन किया है और कुछ इस प्रकार से समावेश हुआ है फलों का हमारे मानव जीवन में, कि मौसम के हिसाब से यदि फलों का सेवन किया जाए तो वह न केवल बेहतर एंटीऑक्सीडेंट की तरह कार्य करते हैं बल्कि शरीर को विषैले तत्वों का निस्तारण हो जाता है तथा शरीर की शुद्धता बचाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. यहां यह समझने की बात है कि सर्दियों के फल सर्दियों में शरीर को आवश्यक होने वाले तत्वों को कुछ इस प्रकार एकत्र कर लेते हैं कि पूरे साल आपको उनकी दैनिक आपूर्ति होती रहती है और आप स्वस्थ बने रहते हैं. उदाहरण के तौर पर सर्दियों में जब तापमान कम होता है तब धूप में बैठने का आनंद अलग होता है इस दौरान विटामिन डी का निर्माण हमारे शरीर में प्रचुर मात्रा में होता है. विटामिन डी शरीर में कैल्शियम का सहयोगी है और कैल्शियम नामक तत्व शरीर में उपस्थित अस्थि तंत्र का मुख्य घटक है. यदि हमारे शरीर में कैल्शियम की मात्रा कम होगी तो हमारी हड्डियां भंगुर हो जाएँगी. समझने वाली बात यह है कैल्शियम हमें सीताफल या गर्म दूध से सर्दी के मौसम में प्राप्त होता है उसे आंतों के द्वारा शरीर में उपस्थित होने के लिए अवशोषण के लिए विटामिन डी की आवश्यकता होती है इस तरह सर्दियों में विटामिन डी के एकत्र होने के कारण कैल्शियम की आपूर्ति इतनी हो जाती है कि आप साल भर तक कैल्शियम के एक माध्यमिक औसत स्तर को बनाए रखते हैं और और अनजाने में ही आपके शरीर में विटामिन डी और कैल्शियम के तत्वों की आपूर्ति साल भर के लिए हो जाती है.

इसी प्रकार यदि आप ध्यान दें, ऋतु फल आम विटामिन ए का प्रचुर स्त्रोत है. इसकी आवक और पसंद दोनों जब भरपूर होती है तो विटामिन की आपूर्ति साल भर के लिए स्थापित हो जाती है. गर्मी के मौसम में कुछ फल ऐसे आते हैं जो पानीदार होते हैं और उस समय क्योंकि आपके शरीर में पानी के साथ-साथ इलेक्ट्रोलाइट्स यानी सोडियम पोटेशियम क्लोराइड का हास होता है तो ऐसे फल जैसे खरबूज, तरबूज, ककड़ी जो पानीदार फल है, गर्मियों के दिनों में आपके धूप के एक्सपोजर में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं और आपके शरीर में होने वाली कमी को दूर करने का प्रयास करते हैं ना केवल पानी बल्कि सोडियम,पोटेशियम, क्लोराइड जैसे इलेक्ट्रोलाइट हमारे शरीर में जो कम हो जाते हैं उनकी आपूर्ति इन तत्वों से हो जाती हैं. गर्मियों के मौसम में फालसे, बेल, शहतूत जैसे फल भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं जिनके द्वारा ना केवल ऊर्जा की आपूर्ति होती है बल्कि और क्रोमियम की आपूर्ति भी होती है. इसी मौसम में उपलब्ध होने वाले अंगूर का सेवन यदि बीज़ समेत किया जाए तो वह अनेक तत्व जो शरीर में आवश्यक रूप से अनिवार्य होते हैं, की आपूर्ति कर देते हैं.

शरद ऋतु का आरंभ प्रकृति के पतझड़ के रूप में समझा जाता है जो सितंबर-अक्टूबर के अंग्रेजी केलेण्डर से मेल खाता है जब अनार केले जामफल मुसम्मी पपीता अजीत जैसे फल प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होते हैं जो विटामिन सी पोटेशियम तथा विटामिन के साथ फाइबर, बी-6, मैग्नीशियम, कॉपर, मैंगनीज, जिंक के प्रचुर स्रोत हैं. फाइबर हमारे शरीर का महत्वपूर्ण घटक है जो आंतों की सफाई बेहतर बनाए रखने में सहयोग करता है और कब्ज जैसी बीमारियां नहीं होने देता है

 

हेमंत ऋतु शीत ऋतु के पूर्व आने वाला काल है जो हूँ अंग्रेजी माह के नवंबर दिसंबर से मेल खाता है जब सीताफल अनार आंवला सिंघाड़ा कमलगट्टा मुनक्का जैसे फल प्रकृति की अनमोल धरोहर होते हैं और इन फलों में कैल्शियम के अतिरिक्त विटामिन ए आयरन पोटेशियम मैग्नीशियम कॉपर विटामिन बी सिक्स और आयरन के साथ फास्फोरस और विटामिन सी भी प्राप्त होता है इस मौसम में प्राप्त होने वाला मुनक्का रेसवेरेट्रॉल का प्रचुर स्रोत है जो एक एंटीऑक्सीडेंट की भांति काम करता है और शरीर को डीटॉक्सिफाई करने या जहर से मुक्त करने में कार्य करता है

शीत ऋतु जो ठंड का मौसम है दिसंबर – फरवरी के अंग्रेजी कैलेंडर से मेल खाता है जब अमरुद सीताफल संतरा चीकू पपीता जैसे फल प्रचुर मात्रा में प्राप्त होते हैं जो विटामिन सी के अतिरिक्त कैल्शियम पोटेशियम विटामिन बी कॉन्प्लेक्स तथा फोलेट के प्रचुर स्रोत हैं .

बसंत ऋतु जो फरवरी-मार्च के अंग्रेजी माह से मेल करती है, के प्रमुख फल पपीता बेर अमरूद आंवला संतरा चीकू तथा आम है आम जिसे फलों का राजा समझा जाता है विटामिन ए सी और के के अतिरिक्त पोटेशियम बीटा कैरोटीन कोलीन और मैग्नीशियम का प्रचुर स्रोत है. आमला में विटामिन सी तथा विटामिन ई की समुचित मात्रा उपलब्ध होती है. पपीता पोटेशियम तथा कैल्शियम के साथ-साथ विटामिन ए और विटामिन सी का स्त्रोत है.

ग्रीष्म ऋतु में जब तापमान अधिक होता है जो अंग्रेजी के कैलेंडर माह मई एवं जून से मेल करती है मैं लीची तरबूज खरबूज बेल और नारियल के फल उपलब्ध होते हैं जिनका सेवन किया जाना चाहिए. लीची पोटेशियम कॉपर रूटीन एमपी के अतिरिक्त बी कॉम्प्लेक्स विटामिन तथा विटामिन सी का प्रचुर स्रोत है जबकि तरबूज खरबूज और नारियल से विटामिन सी पोटेशियम कॉपर B5 विटामिन ए पोटेशियम कैल्शियम सेलेनियम एवं सोडियम जैसे तत्व प्राप्त होते हैं

वर्षा ऋतु जो अंग्रेजी कैलेंडर माह जुलाई एवं अगस्त से मेल करती है मैं पीस नाशपाती चेरी तथा जामुन जैसे फल आम के साथ उपलब्ध होते हैं जो शरीर में विषैले घूमने वाले फ्री रेडिकल्स के विरुद्ध एंटीऑक्सीडेंट्स उपलब्ध कराते हैं इनके साथ बी सिक्स विटामिन सी पोटैशियम मैग्निशियम आयरन कैल्शियम भी सेवन करने पर उपलब्ध होते हैं

ऋतु के मान से, फलों का सेवन ना केवल मानव जाति बल्कि जीव जंतुओं को भी स्वस्थ रखने में अति सहायक है. शरीर एक फैक्ट्री की भांति कार्य करता है जिसे रॉ मैटेरियल / कच्चे माल की आवश्यकता होती है जो रॉ मैटेरियल को प्रोसेस करता है और एक रेडी मटेरियल उपलब्ध कराता है इस प्रक्रिया में बायप्रोडक्ट भी उत्पन्न होते हैं वेस्ट प्रोडक्ट भी उत्पन्न होते हैं और शरीर में जहर जैसे विश जैसे तत्व एकत्र हो जाते हैं जिन्हें फलों एवं प्रचुर पानी की सेवा सेवन से शरीर से बाहर निकाला जा सकता है इन फलों के नियमित सेवन से शरीर में उत्पन्न होने वाले फ्री रेडिकल्स जो कैंसर एवं किडनी जैसे रोगों के कारक तत्व हो सकते हैं को न्यूट्रलाइज करने के लिए के लिए एंटीऑक्सीडेंट्स उपलब्ध कराता है जिनसे शरीर अपनी पावन अवस्था में रह पाता है और रोगों से लड़ने की एक अनिवार्य शक्ति बना पाता है संदेश यह है की फलों का नियमित सेवन प्रश्न जल सेवन के साथ किया जाना चाहिए तथा शरीर को स्वस्थ रखने के लिए 24 में से 1 घंटे व्यायाम करने के लिए देना ही चाहिए ताकि पसीने के माध्यम से भी शरीर में उपस्थित विषैले तत्वों का निराकरण हो जाए

डॉक्टर अनिल कुमार भदौरिया जनरल फिजिशियन इंदौर 452001 फ़ोन नंबर 98260 44193

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  1. perfect diet as advised by Dr anil -he ihimself a fitness freak personalities-thanks for sharing healthy tips- to society–dr anil is a personality who aways think about betterment of society –

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