Movie Review : RUSH

दौड़ या रेस का जीवन एक ऐसा परिदृश्य प्रस्तुत करता है कि जीतते रहने की आदत जीवन के उसे अद्भूत रंग से वंचित कर देती है जो जीवन की सुधि और निर्मल विचारधारा को स्थापित करती है.

गणना उपरांत खतरों (Calculated Risk) की संभावनाओं को ध्यान में रखकर दौड़ का समायोजन कुछ इस प्रकार से किया जाए कि जीवन भी सुरक्षित रहे और जीवन के साथ-साथ दौड़ का आनंद भी आए, कुछ इस प्रकार का संदेश, 1974 से 1976 के फॉर्मूला वन रेसिंग कार के 2 शीर्ष स्तरीय प्रतियोगियों के मध्य प्रतिस्पर्धा के जीवंत प्रदर्शन पर देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

2013 में बनी हॉलीवुड मूवी रश (RUSH) को देखने का आनंद कुछ इस प्रकार से भिन्न था कि यह जीवन वृतांतों पर तो आधारित है ही परंतु एक अद्भुत संदेश भी देती है कि अनुशासन के पालन से अपनी शर्तों पर जीतते हुई जीवन में भी आनंद का समावेश भी किया जा सकता है जो भौतिक आनंद से भिन्न है.

दूसरा प्रतियोगी कुछ इस प्रकार से वर्ल्ड चैंपियन बनता है जो न केवल आक्रामक है कामदेव की भांति सुंदर है और उसी प्रकार की जीवन शैली जीता है जो भौतिक सुखों को उपलब्ध कराती हैं.

जेम्स हंट तथा निकी लाउरा जो सत्तर के दशक के फॉर्मूला वन कार के वर्ल्ड चैंपियन द्वय के मध्य स्थापित प्रतियोगिता का यह दृश्य चित्र देखने योग्य है, जहां जीवन के मूल्य के प्रति सम्मान और माया के प्रति लोभ दोनों एक साथ प्रदर्शित होते हैं.

घायल होने के बाद खड़े होकर पुनः प्रतियोगिता में सम्मिलित होने का जीवट भी आश्चर्यचकित करता है. इस अति पराकाष्ठा के खेल में जहां गति,नियंत्रण, खतरा, अनुशासन और आक्रामकता सभी तत्वों का समावेश किया जाना आवश्यक होता है, प्रस्तुति अद्भुत बन पड़ी है

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