Movie Review: Maidan

मूवी रिव्यू: मैदान

खेल आधारित जीवन वृतांत नितांत अछूते जीवन रहस्यों से साक्षात्कार करते हैं. पूर्व में भी किंग रिचर्ड, चक दे इंडिया जैसे खेल आधारित चलचित्र एक शैक्षणिक सत्र से अधिक सिद्ध होते हैं कि किन विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए खिलाड़ी और कोच सफल हो पाये और जब भारतीय फुटबाल पर ऐसी मूवी देखने को मिले जहां इस सफल कोच की मौत के बाद भारत का फुटबाल ही अन्तराष्ट्रीय स्तर पर दफन हो गया तो आश्चर्यचकित होना बनता है. मैदान, नामक यह फिल्म फुटबाल कोच सैयद अब्दुल रहीम के जीवन पर आधारित है जो भारतीय टीम के 1951 से 1962 तक कोच थे.


तत्काल स्वतंत्र हुए भारत देश के सीमित संसाधनों की स्थिति में एक टीम को खड़ा करना, नंगें पैर 1956 में और पहली बार जूते पहनकर 1960 ओलंपिक में टीम खिलाना और एशियाड में जबरदस्त विपरीत परिस्थितियों के बाद भी न केवल फुटबॉल दल का गठन करना, हौसला बनाए रखना और निरंतर अपनी रणनीति में फेर बदलकर टीम हित और देश हित में एक उदाहरण प्रस्तुत करना इस कथानक का उजला पहलू है. हालांकि यह सही बात है कि प्रतिभा को रोकने के लिए गतिरोधकों की भारतीय समाज में कतई कमी नहीं होती है जहां न केवल खेल पत्रकार बल्कि फेडरेशन और तंत्र भी खिलाड़ियों के पक्ष में कोई निर्णय बड़ी ही दारुण परिस्थितियों में ही ले पाते है.

1960 के दशक का परिदृश्य जो प्रस्तुत किया गया है वह आज के दौर में भी कहीं कमोबेश इस दृश्य की पुनरावृत्ति को भी प्रस्तुत करता है. मैदान, अजय देवगन द्वारा कोच के जीवन अभिनय से सज्जित है जो अपनी गहराई भरी आंखों के माध्यम से बिना बोले ही संदेश पहुंचने में एक बार सफल होते हैं जहां तक उस दौर के परिदृश्यों को प्रस्तुत करने का प्रश्न है तो आप आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रहते हैं जब 1950-60 के दशक की वेशभूषा, राजनीतिक परिदृश्य और दर्शकों की मानसिकता को भली-भांति प्रस्तुत किया गया है. यदि आप जीवन वृतांत यानी ऑटोबायोग्राफी तथा खेलों में रुचि रखते हैं तो यह चलचित्र आपको आनंदित करने में निश्चित रूप से सफल होगा

मैदान में खेल के दौर का चित्रांकन अद्भुत है और विस्मित करता है वहीं साजिशों का दौर भी विचलित करता है जो इस उपमहाद्वीप के नैतिक चरित्र का संभवत प्रतीक भी है कि पहले किसी प्रतिभा को आगे बढ़ने से रोका जाए और जब रोक न पाए तो खेल बिगाड़ा जाए. एकमात्र आपत्ति इस फिल्म में है जो कचोटती है वह है अतिशय धुम्म्रपान और मदिरपान का प्रदर्शन.

फिल्म मनोरंजक और देखने योग्य है

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