चलचित्र समीक्षा –
— लापता लेडीज —
ग्रामीण परिवेश के दृश्यों के साथ समाज का चित्रण और उस पर समस्या और समस्या से निदान की नितांत ज़मीनी उपायों की चलचित्र व्याख्या है लापता लेडीज़….
हालाँकि इस चलचित्र का विषय हास्य तत्व है परंतु इस चलचित्र के छायांकन और कथानक में कई उजले पक्ष प्रस्तुत होते हैं और वे आपको भावनात्मक रूप से द्रवित होने से नहीं छोड़ते है. कथानक नया है, विवाह पश्चात विदाई में दो दुल्हन के ट्रेन यात्रा में बदल जाने का प्रसंग है जो अपनी रोचक नाटकीयता के चलते एक ऐसा चित्र प्रस्तुत करता है जहाँ समाज में अच्छे लोगों का सहायता का हाथ कुछ इस तरह से आगे बढ़ता है कि व्यक्ति का व्यक्ति के प्रति विश्वास न केवल स्थापित होता है बल्कि दुनिया में अच्छे लोगों की सहायता की भावना से हाथ बढ़ाने और उनकी संख्या भी अभी बची है. मानवीय कमज़ोरियों का प्रकटन भी पुलिस थाने में प्रतीत होता है जब पूरे कथानक में एक बुरे थानेदार के अंदर से भी एक अच्छा व्यक्तित्व निखर आता है और वह भी सहायता का हाथ बढ़ा देता है.
कथानक न केवल रोचक बन पड़ा है बल्कि स्त्री शिक्षा की आवश्यकता और ग्रामीण परिवेश में बिखरी हुई प्रतिभा की पहचान और उसके पल्लवित होने के मौक़े के उदाहरण भी प्रस्तुत करती है जो पुरुष प्रधान समाज में कहीं छुपी या दबी रह जाती है.
चर्चित चेहरा रवि किशन ने पान खाते हुए थानेदार का अद्वितीय अभिनय किया जिसके रंग निरंतर बदलते है जो आश्चर्यचकित करता है.
किरण राव निर्देशित यह फ़िल्म आमिर ख़ान प्रोडक्शन के अन्तर्गत बनी है जिसमें सारे कलाकार गाँव की ठंडी बयार जैसी अनुभूति देते हैं जो आजकल की फ़िल्मी दुनिया के कृत्रिम एसी की २० डिग्री तापमान के भौंडे प्रदर्शन को भी मात करती है.

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