Be Humane

बूझो कैसे बने, आदमी…

आदमी को आदमी समझे आदमी तो आदमी बन जाए आदमी,
पराए को पराया न समझे तो अपना बन जाये आदमी.

धर्म को सहायता धर्म समझे तो धर्म समझ जाएं आदमी,
मर्म कर्म का समझे तो धर्म समझ जाएं आदमी.

सत्य को धर्म का आधार माने तो आदमी बने आदमी,
पंचतत्व का अनमोल रत्न, उसमें लीन होना आदमी.

नर को नारायण माने तो नारायण बन जाये आदमी,
सुकृति को ढूढ़ता फिरे, प्रकृति का मोल न जाने आदमी.

सुंदर धन को अभिलाषी, विकृति फैलाता आदमी,
बचपन की शिक्षा छोड़े, मां पिता को भुला दे आदमी.

…यूंही एक कविता उधेड़ दी है आपके सामने, मजा न आये तो इग्नोर कीजिये…
😜🤣

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