चलचित्र की समीक्षा
भावनाएं, मानव मस्तिष्क की संवेदना को अजीब प्रकार से छूने वाली स्थितियां होती हैं जो आपको ना चाहा हुआ भी करने को मजबूर कर देती हैं. ऐसा ही कुछ अनुभव नेटफ्लिक्स पर एक चलचित्र
चोर निकल के भागा
को देखने का अवसर प्राप्त हुआ जहां एक स्त्री की भावनाओं से जबरदस्त खिलवाड़ किया गया और कहानी में इस स्त्री को दुर्गा रूप दिखाकर एक सस्पेंस थ्रिलर प्रस्तुत किया गया जिसमें इंटरनेशनल फ्लाइट के दौरान एक चोरी, एक हाईजैक, एक बम का डर, नेता जी का भ्रस्टाचार और मारपीट का वह दृश्य प्रस्तुत किया गया कि दर्शक को वह न केवल बांध रखने में सफल रहा बल्कि कहानी में रुचि पैदा करने के साथ-साथ एक रोमांच की नई स्थिति को उत्पन्न करने में भी सफल रही.
निर्देशक का कहानी का बिंदुवार प्रदर्शन कसावट भरा है और 1 घंटे 40 मिनट के इस दृश्य चित्र को आनंद की अनुभूति के साथ देखा जा सकता है. संदेश भी इस चलचित्र में यह है कि स्त्री की निर्मल एवं कोमल भावना के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए. सन्नी कौशल और यामी गौतम ने अच्छा कार्य किया है और चलचित्र देखने योग्य है

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