Movie Review: TopGun

कल रात मेव रिक याने टॉम क्रूज के लड़ाकू जहाजों से प्रत्यक्ष सामना हुआ और 80 के दशक की सुपर हिट मूवी, टॉपगन के अगले संस्करण का जबरदस्त दर्शन हुआ. इंदौर के ट्रेजर आइलैंड में 4Dx थिएटर में टॉप-गन के हिंदी रूपांतरित चलचित्र का अवलोकन कर ऊर्जा का वह संचार उपस्थित हुआ कि जैसे एफ-16 लड़ाकू विमान के कॉकपिट में टॉम क्रूज नहीं आप स्वयं बैठे हैं
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यह अतुलनीय अनुभव था और जहां तक चलचित्र की समीक्षा का प्रश्न है तो यह मैं कहना चाहूंगा कि जिन्होंने पुरानी टॉपगन नहीं देखी है वे भी टॉप गन के इस नए संस्करण को देखकर चल-चित्र बनाने की नई विधाओं का अनुपम दर्शन कर सकते हैं जो न केवल विज्ञान के नए आयामों को छूता है बल्कि फाइटर जेट, डॉग फाइट, आपसी प्रतिस्पर्धा, गुरु का सामने से आकर नेतृत्व करने का भाव और आपसी संबंधों में दबी भावनाओं के तूफान से भी आप को भिगो देता है, जब पिछड़ते हुए एक फाइटर, रूस्टर अपने पिता समान चाचा मेव-रिक को डैड कह कर आदेश की उम्मीद करता है.
जिस प्रकार अकल्पनीय तेज गति से उड़ते हुए फाइटर जेट, एंटी-ग्रेविटी फोर्स का सामना कर 9 से 10G तक पहुंचते हैं तब उनका शरीर, मन, मस्तिष्क हजार किलो के वजन के बराबर हो जाता है और वे लगभग शून्य हो जाते हैं, तब यह समझ आता है कि मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से दुनिया के सबसे मजबूत और स्वस्थ व्यक्तियों का ही यह कमाल है कि वह वायु-सेना के लड़ाकू विमानों का परिचालन करें और अरबों रुपए के इस सिंगल सीटर को सीधे आसमान की ऊंचाइयों पर चढ़ा दें.
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एक अनुपम और अद्भुत अनुभव था, टॉपगन के नए संस्करण को देखने का, और सुखान्त देख खुशी मन, बिना बोझ थिएटर से निकलो तो अच्छा ही लगता है…रोमांचित हुआ मैं

पंचलाइन: सोचो मत, करो…

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