सत्यम वद , धर्मम चर……….
दुनिया में मानव के लिए सबसे आसान काम क्या है ?
पूछ लिया मैने एक दिन, आध्यात्मिक कक्षा में. उत्तर सभी को देना है सोच लें… अपने अपने उत्तर,
कह दिया आदेशात्मक स्वर में.
लगभग चालीस छात्रों की क्लास में स्त्री, पुरुष, अति-जवान, रंगीन वृद्ध, बेरंग धनी, नौकरीपेशा शून्य…….सब उपस्थित थे. कुछ संकुचा गए कि यह कैसा प्रश्न है आध्यात्म की क्लास में…और कुछ मन ही मन मुस्कुरा गए कि इस आसान प्रश्न का क्या औचित्य है ??
बोल उठा मैं फिर – यहाँ हम जटिल को आसान बनाने के लिए समझने के लिए एकत्र है, यह प्रश्न, कि दुनिया में सबसे आसान काम क्या है, क्या जटिल है या आसान …
सभी के मस्तिष्क में बादलों की तरह विचार घूमने लगे.
इस प्रश्न से क्या प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है… यह एक बड़ा प्रश्न सूचक चिन्ह सभी मस्तिष्क में उठ खड़ा हुआ.
बहरहाल उत्तर प्रारंभ हुए……….
बिस्तर पर सोना सबसे आसान है…
निंदा करना सबसे आसान है…
भाषण करना सबसे आसान…
पैसे खर्च करना सबसे आसान…
प्यार करना सबसे आसान…
सबसे आसान है व्यायाम करना..
सबसे आसान घृणा करना है मानो न मानो..
सबसे सरल है पैदल चलना
सबसे आसान है जीवन जीना, बस बहते रहो…
सबसे आसान है, सांस लेना…
सबसे आसान है सहायता करना
सबसे आसान है गणित करना
सबसे सरल मौन होना
सबसे सरल क्रोधित होना
सबसे आसान…..
…ओर उत्तरों की झड़ी लग गई,
मैं मूक हो सबकी मुखमुद्रा देखते रहा, कि भिन्न शहरों की भांति परमपिता परमात्मा ने मस्तिष्क भी भिन्न भिन्न प्रकार के सृजित किए हैं जो एक राय पर कभी भी न सहमत होने वाले स्वयंभू ज्ञानी है……मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना ….
उत्तर अभी भी जारी है…
समाधि लगाना सबसे आसान
पलायन करना सबसे आसान
योग करना सबसे आसान
हारना तो सबसे ही आसान
जीतना सबसे सरल है
साधु बनना सबसे आसान
शांतचित्त होना सबसे आसान
सन्नाटे का शोर सुनने में आए सबसे आसान
वीतराग में रहना सबसे आसान
अब दूसरे स्तर के उत्तर आना प्रारंभ हो गए थे.
ज्ञान बांटना सबसे आसान
ईश्वर भक्ति सबसे सरल
दुखी मन रहना सबसे आसान
अकर्मण्य रहना सबसे आसान
दूसरों की प्रशंसा करना बहुत आसान
अंजान बने रहना उत्तम और आसान स्थिती
त्याग करना सबसे आसान
मित्रता निभाना सबसे सरल
कर्तव्य पालन करना सबसे उत्तम ओर सरल…
अब सरल ओर कठिन समस्त स्थितियों की खिचड़ी उत्तर प्राप्त हो गए हैं जो संभवतः हकीकत से परे उत्तर भी है, खैर लंबी सांस भरी और उत्तर को उद्यत हुआ…
जो भी कार्य पूर्ण मन से, सद्भाव और निष्ठा से कर पाते हैं वह अत्यंत कार्य आसान कार्य प्रतीत होता है चाहे वह योग हो या भोग, समाधी हो या पलायन ….
नींद भी किसी के लिए आसानतम हो तो पूरी रात नींद ना आए जिसको उसके लिए तो जटिलतम कार्य है.
मौन होना और मौन रहना किसी को अत्यंत भाता हो तो किसी के लिए लगभग असंभव हो.
ध्यान मग्न होना सरल हो किसी को तो सदैव अशांत मन रहना भी किसी की संपत्ति हो सकता है.
स्थितियां हर एक के लिए भिन्न है. आज किसी के लिए आसानतम कार्य जो है वह कल उस के लिए कठिनतम भी हो सकता है भले ही वह हड्डी के टूटने से पैदल चलने जैसा आसान भौतिक कार्य की क्यों न हो…
जबकि मानसिक स्तर पर भी मौन हो या विचारशून्य होना भी किसी के लिए आसान तो किसी के लिए असम्भव हो सकता है..
अच्छा आप ये बताइए जीवन में सबसे जटिल कार्य किया???…
फिर स्वयं उत्तर भी देना शुरू किया.
…स्वयं की साधना करना
…मोक्ष की प्राप्ति की लालसा रखना
…परमात्मा के दर्शन का मोह बनाए रखना
…परमात्मा से बातचीत का लोभ होना
…साकार निराकार के अंतर को समझने का प्रयास करना
…विचारशून्य हो अपने को अज्ञानी मानना
…सच बोलना
…निष्काम प्रेम करना
…अंतर्मन की यात्रा करना चाहिए…
जटिल कार्य के मेरे मन में भी उत्तर आते रहे, घूमते रहे और मैं सोचता चला गया सम्वेत स्वर में कोई इसका कोई एक उत्तर नहीं है.
जगत सत्यम, ब्रह्म मिथ्या
या
ब्रह्मा सत्यम, जगत मिथ्या …
यही माया का इंद्रजाल है कि एकमत न हो, साधक रहो, साधते रहो, साधन भूलो और साधु भाव से लीला में बहते रहो….
चैरेवती चैरेवती
ओर
नेति नेति ,

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