पीपल-नाद…✔️
पीपल के पत्तों की
स्वर लहरी सुन सके तो सुन
बहती पवन यूं हौले से
सहलाती उन्हें गुन सके तो गुन
संगीत उत्पन्न नहीं सन्नाटे का
कर्णप्रिय वह भी होता है
पत्तों में भी होता स्वर
बस कान लगाना होता है
सुबह की किलोल अजब
कलरव तो, कहीं सन्नाटे का शोर
महाभूत पंच का सुबह संगम
कोयल धौर्रेया कागा कहीं मोर
पंचतत्व की लीला अघोर,
सत्यम शिवम सुन्दरम.
दृष्टि दृश्य द्रष्टा का अंतर्मन,
तो पृथ्वी परे, यात्रा अनुपम.
जो मिल रहा प्रचुर मात्रा में
शनै शनै हर सांस में भर रहा
जो नहीं मिला प्रभु न्याय से
उसके पीछे तू अनवरत दौड़ रहा

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