यूं लगी आज एक छोटी सी लाटरी जब आंगन में इस ऊर्जा पुंज को नृत्य करते देखा , आंकड़े के पौधे के निर्मल और पवित्र फूलों पर…और एक कवि हृदय मचल उठा
(Purple Sun Bird, to be prcise)
भोर काले चहकती चिर्रैया,
कानों में रास घोलती.
जैसे कहती हौले से,
लायी हूं प्रभु संदेश.
चिंता न कर
धीर धरो कर्म करो,
सुबह आंगन में
फुदकती आती.
प्रभु का संदेश
सिर्फ मेरे को सुनाने,
इस डाली तो
कभी उस मुंडेर पर.
पानी के मटके पर,
तो कभी दाने पर,
सोचता कभी
किस काम के लिए है ये
कितनी मनमोहक
और सुदर्शन बाला
रंगों से सराबोर,
ऊर्जा की प्रदर्शनी.
इस पल में बस रहती,
बीते को भूलती
वैराग्य का लगाती
अनुपम ध्यान
प्रकृति का नियम
पालन सदा
पढ़ सको तो
पाठ पढ़ाती

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