चिड़िया की संसद
कुछ छोटी चिड़ियों का एक झुंड शाम 7:00 बजे मेरे मोहल्ले के ऊपर, आसमान की ऊंचाई में एकत्र हो जाता है …उड़ता जाता है ….घूम घूम कर, चहचहाता जाता है और निरंतर जगह बदलता जाता है. सोच नहीं पाया कि, क्या यह संसद की कोई सनद बैठक चल रही है या चिड़ियों का कोई खेल क्रंदन चल रहा है या दिन में एक बार अनिवार्य रूप से पूरे परिवार का मिलन…
ये छोटी छोटी काली-काली चिड़िया, चीं-चीं-चीं की आवाज में जगह बदलते हुए उड़ती रहती हैं. झुंड इनका करीब करीब 40-50 का होगा जो एक दिशा से उड़ना शुरू करते हुए हवा के गर्म झोंके पर नभ- नृत्य करते हुए सौ-दो सौ मीटर की गोलार्ध में एक कोने से दूसरे कोने तक बहती चली जाती हैं …ना जाने कहां से आती हैं और सांझ ढले ना जाने कहां चली जाती हैं.. कहां इनका घोंसला है …और वह कहां दिन भर भोजन पानी के लिए मंडराती इतराती फिरती हैं.
प्रश्न जटिल हो सकता है ….समझो तो उत्तर आसान है और नहीं तो उत्तर भी जटिल है कि यह आपस में उड़ते समय इतनी छोटे दायरे में एक दूसरे से टकराती क्यों नहीं और आवाज करते समय यह बतियाती क्या है… इनकी भाषा क्या कहती है …क्या यह ईश्वर की बात करती हैं या जोड़ा बनाने के लिए एकत्र होती हैं…
कोई कुछ कहे, यह समझ नहीं पाता हूं मैं और वह एक जगह से दूसरी जगह मेरी निगाहों से ओझल हो जाती हैं।
इनकी संसद में कोई विपक्ष दिखाई नहीं पड़ता है और तो और राजनीति भी नहीं…..
प्रभुलीला अदभुत…

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