Narmade Har: Nemawar

यात्रा वृतांत : नेमावर,
(नर्मदा तीरे)
महाभारत काल का नाभिपुर बाद में नाभिपटनम और आज के आधुनिक काल में नेमावर के नाम से प्रसिद्ध देवास जिले में स्थित है. नेमावर की खूबी यह है कि अमरकंटक से निकलकर खंभात की खाड़ी (अरब सागर) में मिलने वाली 1312 किलोमीटर लंबी रेवा या नर्मदा नदी का बिलकुल मध्य का स्थल नेमावर में है जहां नदी के बहाव के मध्य में नाभि कुंड भी उपस्थित है और इसीलिए आज से 5000 वर्ष पूर्व भी नेमावर का नाम नाभिपुर के नाम से प्रसिद्ध था.


उस काल में भी व्यापार का बड़ा केंद्र होते हुए यह क्षेत्र उर्वरक भूमि से पूर्ण थे तहसील क्षेत्र आज भी व्यापार के साथ-साथ गेहूं प्याज लहसुन और गन्ने की खेती का मुख्य पैदावार और व्यवसाय का केंद्र है. इसी के साथ नर्मदा नदी का श्री सिद्धेश्वर घाट देवास जिले में स्थित है जबकि 700 मीटर लंबे पाट के दूसरी ओर हंडिया घाट हातोद जिले का हिस्सा है.
सिद्धेश्वर घाट पर एक प्राचीन मंदिर स्थित है जो अपनी वस्तु कला की अविश्वसनीय छवि के कारण आकर्षण का केंद्र है इस शिव मंदिर के गर्भ ग्रह और प्राचीर पर जो पत्थर लगा है वह अपनी कलात्मक मूर्तियों एवं सजावट से बरबस ही किसी भी दर्शक आकर्षित कर लेता है और आश्चर्यचकित करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है.

लगभग 11वीं शताब्दी में बने परमार राजाओं के द्वारा बनाए गए इस मंदिर की छत का निर्माण, मंदिर के अंदर की सजावट और शिखर पर की गई अलंकारमय नक्काशी हतप्रभ कर देती है. आश्चर्य होता है कि उस काल में कैसे औजारों से यह निर्माण किस प्रकार किया गया होगा जो आज 1000 बरस बाद भी न केवल स्थापित है बल्कि अपनी कला की सुगंध बिखेर रहा है.

इसी प्रकार नेमावर नगर, जैनियों का भी एक तीर्थ स्थल है जहां आठवीं शताब्दी की जैन तीर्थंकरों की मूर्तियां नदी के तल से प्राप्त हुई थी. नाभिकुंड जो नदी के मध्य में है तक मोटरबोट से जाया जा सकता है और उथला पानी होने पर नाभिकुंड पर बने चबूतरे तक पहुंचा जा सकता है.

वैसे तो नर्मदा नदी हम भारतीयों के लिए पावन और पवित्र जीवनदायिनी प्रकृति है परंतु घाट पर बैठकर जब बहती हुई रेवा नदी का दर्शन करो तो ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह बहता हुआ मंदिर है जो अनादि काल से इस पृथ्वी और समाज के प्रति अपनी नैतिक दायित्वों का निर्वहन कर रही है जिसके द्वारा मानव समेत समस्त जीवों को जल का पूर्ति हो रही है. यह भाव आते ही प्रकृति की अनमोल लीला के प्रति एक अनमोल कृतज्ञ भाव उग जाता है.

कहने को तो इंदौर से 128 किलोमीटर की सड़क मार्ग से विशेष दूरी पर नहीं है परंतु सड़क निर्माण कार्य जारी होने से साढे तीन घंटे तो जाने में ही लग जाते हैं परंतु पुरानी बात है कि मजा यात्रा में है.
परंतु एन एच 47 रतलाम – नागपुर हाईवे पर यात्रा हो तो नेमावर में श्री सिद्धेश्वर शिव मंदिर और घाट से नाव द्वारा नाभिकुंड के दर्शन का संयोग बनाया जा सकता है.

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