

Movie Review:
Toolsidas Jr
जीवन के संघर्षों पर आधारित कोई घटनाक्रम एक चलचित्र के माध्यम से देखने का संयोग हो जाए तो यह बड़ा सुखद अनुभव होता है उस पर खेल से संबंधित एक छोटे बच्चे के त्याग की भावना के साथ अपने पिता की साख को पुनः स्थापित करने का परिश्रम यदि सेल्लुलोईड पर उतार लिया जाए तो यह अत्यंत आश्चर्यजनक प्रतीत हुआ.
नेटफ्लिक्स पर तुलसीदास जूनियर नामक फिल्म, स्नूकर नामक टेबल गेम पर आधारित है जो एक धैर्य और कौशल के संगम वाला ऐसा खेल है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति के लिए आसान प्रतीत होता हो परंतु जब कोई टूर्नामेंट के जीतने का प्रश्न आए तो आपको सर्वोच्च न्योछावर ही करना होता है. समुचित प्रशिक्षण के साथ अपने मस्तिष्क को शीतल बनाए रखकर अर्जुन की आंख की भांति ध्येय सिद्धि एक आसान कार्य न हो कदाचित परंतु इस 15 बरस के बालक ने स्वयम्भू चुनौती स्वीकार करके खेल में अपनी 1 साल की मेहनत से 1995 में क्लब टूर्नामेंट जीत कर जिस प्रकार अपने पिता को पुरस्कृत किया है वह न केवल अविश्वसनीय है, अद्भुत है बल्कि अकल्पनीय है, रोचक है और विस्फारित नेत्रों से देखने योग्य है.
कहानी का घटनाक्रम कुछ इस तरह है कि कोलकाता के एक प्रतिष्ठित क्लब में एक सदस्य तुलसीदास, स्नूकर के प्रतिष्ठित खिलाड़ी हैं परंतु साजिशों और कमज़ोरियों के चलते फाइनल में लगातार हारते जाते हैं जिसका उनके छोटे बेटे को बड़ा बुरा लगता है. जीवन के विभिन्न झंझावतों को झेलते हुए वह स्कूल से समझौता कर एक पूर्व नेशनल स्नूकर चैंपियन मोहम्मद सलाम से बड़ी विकट परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं और कई बाधाओं को पार कर सुखद अंत की ओर ले जाते हैं.
इस कथा चित्र में जीवन की अमूल्य शिक्षाओं से भी साक्षात्कार हुआ जब सेमीफ़ाइनल में वॉकओवर मिलने पर उस छोटे बालक को पूर्व नेशनल चैंपियन खेल भावना की शिक्षा देते हैं जो नैतिकता का न केवल एक अद्भुत पाठ है बल्कि जीवन जीने की एक शैली भी प्रदर्शित करता है.
प्रथम अवसर पर देखने योग्य


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