मूवी रिव्यू
DHH
इस नाम DHH (ढ़) से यदि एक राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त गुजराती चलचित्र के देखने का संयोग हो जाए तो यह जानकर आश्चर्य होगा कि DHH… का तात्पर्य है डीफ एंड हार्ड टू हियरिंग. और तीन बच्चों के इस कथानक में मनोरंजन, रोमांस, सस्पेंस के साथ-साथ एक अनमोल शिक्षा का समावेश कुछ इस प्रकार से किया गया है कि यह चलचित्र बस देखते ही बनता है.
पांचवी कक्षा के छात्र अपनी शिक्षा संबंधी कमजोरी को पहचान कर जादू के माध्यम से पांचवी कक्षा पास करने के लिए एक जादूगर की सहायता से हिमालय चढ़ने जैसा प्रयास करते हैं. स्कूल और घर की रोचक स्थितियों के चलते तीन छोटे बच्चों की यह कहानी न केवल आपको बांधे रखती है बल्कि अपने कथानक की उच्च गुणवत्ता और रोचक संवादों के जरिए आपके बचपन को पुनर्जीवित करने में कोई कसर भी नहीं छोड़ती है. कुछ संवाद तो अद्वितीय बन पड़े हैं जो पांचवी कक्षा के छात्रों के ही स्तर के प्रतीत होते हैं जैसे जादुगर से मिलने के लिये बस में बैठकर बोलना कि
टिकट दे दीजिए पाकिस्तान का
या मैडम ने कहा है
कोई जादू ही हमें पास करा पाएगा !
इसलिए जादू चाहिए, की तीव्रता कुछ इस प्रकार बनी रहती है कि अंत होते-होते शिक्षा के मूल उद्देश्य याने शिक्षा हेतु श्रम के मूलमंत्र को स्थापित करने में यह चित्रकथा न केवल सफल है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार भी जीत पाने में सफल होती है.
नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध यह फिल्म परिवार के बुजुर्ग की महत्वपूर्ण स्थिति और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाला संरक्षक के तत्व से न केवल विस्मित करता है बल्कि उनके द्वारा दी गई शिक्षा से
अंत में जो परिवर्तन आता है वह अभूतपूर्व बन पड़ा है.
शिक्षा के इस बदलते दौर में इस प्रकार की कथा चित्रों का दर्शन बड़े होते बच्चों के माता-पिता को अवश्य करना चाहिए जो सभी को संवेदनशील हो सकने में सहायक है. फिल्म गुजराती में है परंतु सब-टाईटल हिन्दी में होने के साथ हिन्दी में संवाद भी हैं जो कथा की लय को पिछड़ने नहीं देता है.
अवश्य देखने योग्य

Leave a comment