2 असमान स्तर के मित्रों का अद्भूत संवाद-
मित्र- मुझे पुरस्कार चाहिए
सुधि मित्र – कई संस्थाएं बांट रही है
नहीं नही, वैसा नहीं !
याने ?
याने पैसे देकर मिलने वाला पुरस्कार नहीं चाहिए!
तो कौन सा चाहिए ! मेहनत वाला ?
हां वह हो जाए तो वाह!
तो मेहनत करो मिट्टी में !
अरे मेहनत वाला पुरस्कार बिना मेहनत के चाहिए!इसीलिए तो आपसे कह रहा हूं
वह तो बड़ा जटिल है
अरे नहीं भाई साहब भारत में तो जुगाड़ चलता है!
प्लीज करवा दीजिए
मतलब, गधा होकर घोड़ा बनना चाहते हो!
स्तब्ध!
मौन!
आप तो मेरी धूल उतार रहे हैं !
अरे भाई भलाई करो तो पुरस्कार स्वयं उपस्थित होगा
स्तब्ध
मौन
कोई प्रश्न है मस्तिष्क में?
अभी तक तो सभी को मिल रहे थे ?!
हां अब प्रतिभा चिन्हित हो रही है
तो
तो क्या काम करो, नाम करो
यह तो कठिन है
कठिन है परंतु असंभव नहीं.
निरूत्तर

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