पेड़ से गिरी पत्तियों में
जीवन बिखरा पड़ा है
तने से जुड़ा था कभी
आज भू पर छितरा पड़ा है
था यूं ऊर्जा से भरपूर
आज धरती चूमने को
लीला का अंत कर
उसके आग़ोश में पड़ा है
कहने को मित्र था
तने ओ शाखा का
ग़लबहियाँ के मौसम में
प्रेम में डूबा पड़ा है
सबको अपने से
बड़ा समझता हूँ
छोटे बना रहने में
आनंदित हुआ पड़ा है
पत्ती कहो पर्ण या
कहो क्लोरोफ़िल
निभाने को प्राणवायु
पैदा किये पड़ा है
कहीं हरि तो लाल,
पीली होने से पूर्व.
पत्तियों का विज्ञान,
विस्मित किये पड़ा है
विन्यास तो इतने भिन्न
कहीं गोल तो कंटीले
एक समान कहीं नहीं
यादगार किये पड़ा है
एक दिन कोंपल पत्ती
तो किसी दिन जवाँ
त्याग को आतुर सदा
भोजन होने पड़ा है
होना एक दिन पीला
कुछ इस तरह तजने को
अहिस्ता से छोड़ें घर
निस्तार हुए पड़ा है
नष्ट होने को तत्पर
पंचतत्व में विलीन
यात्रा पूरी होने को
कर्म पथ तय किये पड़ा है

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