अमृत वर्षा …
सूर्य की अमृत वर्षा,
भूलोक की धाती है.
रश्मि पुंज का क्षितिज,
लोकचक्षु कहलाती है.
काशी के लोलार्क की यात्रा से,
रवि दर्शन को मुक्ति नयना.
सप्त्श्रवाहन के चालक बलिहारी,
बैशाख के तुम सूर्य अर्यमा.
पीतवर्ण सहस्त्र किरण,
काशी के तुम उत्तरार्क.
ज्येष्ठ मासे मित्र नामे,
उदय पर्वत निवासी.
अशाढे अरुण रथारूढ़,
द्रोपदी अक्षय पत्र दाता,
सावने तुम इंद्रा – आदित्य,
शिव के तुम मयूखादित्य.
मंगलागौरी को पूजते,
शिवलिंग अधिष्ठाता…
भादोमासे विवस्वान कहते,
श्वेत अश्वों के अनुगामी.
नदी की भांति बहते मार्तंड,
समय पर होकर सवार.
सतरंगी आलोक से पालन करते,
जीवन के तुम लोकाधार.
औषधि के दाता तुम अलौकिक,
जल चक्र के निर्मल वाहक.
मौसम मौसम कल्प दर कल्प
दमकते, चमकते तारा तुम.

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