Tiger Tale

बाघ के किस्से

दो किस्से सुनाता हूं सीधे बाघ से संबंधित हैं बाघ का एक्स्पोज़र होता है तो इस महामना महा शक्तिमान मानव की क्या स्थिति होती है आपका अंदाज लगेगा…

… चुनाव में ड्यूटी लगी थी विधानसभा की, आज से 20 साल पुरानी बात है, मेरा जोनल ऑफिसर डी.एफ.ओ.(IFS) था. चोरल के आसपास के जंगलों में मेरी ड्यूटी थी, घना जंगल था डीएफओ साहब को एक किस्सा याद आ गया और वे सुनाने लगे… मैं एक बार जंगल में जिप्सी में चर्चा करते हुए जंगल छानते फिर रहा था. कुछ सूचना थी कि कुछ सागवान चोर, लकड़ी के लिए जंगल में पधारे हैं तो हम बाघ की बात करने लगे. मैं, मेरे साथ मेरा ड्राइवर, 2 जवान और एक रेंजर जिप्सी वाहन में थे और चलते चलते हम एक नाले पर पहुंचे और बात करते-करते बाघ के संबंध में बात करते-करते जंगल की नदी में ढलान पर गाड़ी धीरे करने लगे तो बगल में चढ़ाई पर से हमारी जिप्सी के बिल्कुल बगल से एक कद्दावर बाघ हमारी जिप्सी के बगल में आकर प्रदर्शित हुआ. हमने जैसे उसको देखा ऐसा लगा कि जैसे प्राण छूट गए और उस जंगल के राजा ने हमको एक तिरछी निगाह से देखा और हमारी रुकी जिप्सी के सामने से जंगल की बहती नदी की ओर चला गया, पानी पिया और सामने से नदी के उस पार से जंगल में लुप्त हो गया…. हम पांचों के मुंह से एक शब्द नहीं निकला, सारी अफसरी, दबंगई धंस गयी चूल्हे में।

यह होता है जंगल के राजा का असर …

ऐसा ही एक किस्सा, मुझे कान्हा किसली की यात्रा में मेरे गाइड ने सुनाया था. मैं 4 बार जा चुका हूं और हर बार मुझे बाघ के बच्चों या बाघ के 5 मीटर की दूरी मात्र से पावन दर्शन हुए हैं।

गाइड ने बताया एक बार की एक सज्जन आ रहे थे दो बार से और उनको बाघ देखने को नहीं मिल रहा था तीसरी बार था जब वह बाघ देखने आए थे …आगे की सीट में जिप्सी पर बैठे थे और कोस रहे थे कि क्या होता है बाघ और कैसा होता है बाघ दिखता नहीं है फालतू की बातें हैं कोई बड़ा काम नहीं है यूं ही पैसे खर्च करने चले आते हैं आप…

न जाने कैसे गाइड ने उनके कह दिया कि साहब जब बाघ आता है ना सामने तो पेशाब छूट जाता है। बात आई गई हो गई ।

सुबह 5:00 बजे शुरू होती 9 – 9:30 बजे तक चलती है बाघ ढूंढने के लिए। कान्हा किसली में 9:00 बजे के लगभग एक जगह वह गाड़ी रोक कर खड़े थे, इधर उधर पक्षियों की आवाज सुन रहे थे कि सामने एकदम सन्नाटा हो गया कोई कुछ समझ पाता उससे पहले 100 मीटर की दूरी पर सामने से बाघ, पहाड़ी से नीचे सड़क पर आ गया बिल्कुल जिप्सी के सामने… ड्राइवर, लीड- मेहमान, गाइड और बच्चे सब एकदम मूक हो गए और परिदृश्य में बाघ के सिवा कोई भी नहीं। सब चुप …शांत.

जिप्सी कार बंद, लोगों के मुंह बंद और बाघ ने वहां से चलना शुरू किया जिप्सी की ओर धीरे धीरे आता गया और जिप्सी के बगल से निकलता हुआ वह पहाड़ी चढ़कर जब वह चला गया तब देखा गया कि जो आगे की सीट पर टूर लीडर थे जो बाघ की तीसरी यात्रा पर थे और बाघ को कोस रहे थे, की पेंट गीली हो चुकी थी….

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