Movie Review: 12th Fail

Movie Review: 12th Fail

वैसे तो पढ़ने के इस दौर में ऑटोबायोग्राफी पढ़ना सबसे अच्छा अनुभव होता है परंतु स्क्रीन पर पढ़ने वाले अब पुस्तक में पढ़ने की तुलना में अधिक हो गए हैं और पुस्तकों में लिखित भावनाओं का ज्वार और भाटा जो आप जी सकते हैं वह संभवत सेल्लुलोईड पर उतरकर ना आने पाये.
फिर भी 12वीं फेल एक अच्छा अनुभव हुआ जिसमें कुछ संदेश पुन: स्थापित होते हुए दिखाई पड़े कि दूर -दृष्टि , बड़ा लक्ष्य और कड़ी मेहनत का के माध्यम से ही सफलता के मार्ग पर भाग्य को संवारा जा सकता है. शिक्षा तो यह भी मिली कि किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए कम से कम 1000 दिनों या 4 बरस का दुरूह काल बिताना होता है और माया के इस लोक में अपने दृष्टिकोण को एक बिंदु पर रखे रख कर चलने वाले को ही “वीर भोग्या वसुंधरा” का सुख प्राप्त होता है. गीता का यह श्लोक पुन: स्थापित होता है कि,


हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम्। तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ॥


जिसका अर्थ है: यदि तुम (अर्जुन) युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख भोगोगे.

उसी के अनुपालन में मानव जीवन मेहनत और दूर दृष्टि की टेढ़ी-मेढ़ी सड़क पर भाग्य और सफलता के पेड़ों की छांव प्रस्तुत करती है जिसके नीचे जीवन बिताया जा सकता है. चंबल के मुरैना क्षेत्र का एक मासूम बालक किस प्रकार से अपना जीवन सवार लेता है यह न केवल देखने योग्य कथानक है बल्कि गीता के पूरे श्लोक के क्या महात्म्य है. 12वीं फेल परिवार के सहित बच्चों और बड़ों को एक साथ देखने का अनुभव है जिसे सदैव याद रखा जा सकता है. फौज के सैनिक या अफसर या डॉक्टर की नीट या इंजीनियरिंग आईआईटी की परीक्षाओं में सफलता के लिए बच्चे कितनी मेहनत करते हैं उसकी एक झलक इस प्रस्तुति से मिलती है. कितना त्याग और कितनी मानसिक स्थिति को ठंडा बनाये रखने का प्रयास है यह शिक्षा अनुकरणीय है जो किसी भी व्यवसाय पर भी उतनी ही लागू है.

Restart.
जुगाड़
मुखर्जीनगर
Upsc
Ips

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