पर्यावरण का आरोग्य ….. आरोग्य का पर्यावरण
अरे, भाई डॉक्टर, आजकल बहुत थका थका सा रहता हूँ मैं.
तू तो बचपन से ही थकेला है! इसमें कुछ नया नहीं है.
नहीं यार भाई, तू समझ अब मैं जल्दी थक जाता हूँ, उर्जा ही नहीं रहती है.
कितने का हो गया है तू?
यार , कैसी बात करता है साथ के ही तो हैं हम, ४५ का तू ४५ का मैं.!
अच्छा चल कल तेरी सब जांच करा लेते हैं.
बचपन के मित्रों जिनमे एक चिकित्सक है तो एक व्यापारी, का संवाद चल रहा था. बचपन एक निश्छल काल है और जो इस निश्चलता को कायम रख लेता है उसके बचपन के मित्र आगे के जीवन में भी कायम रह जाते है. भविष्य के उच्च पदासीन व्यक्तित्व भी भूतकाल की बचपने की मुस्कान और उच्छ्ख्रलता के ह्रदय से हामी होते हैं. खैर…
जांच हुई, मित्र को मधुमेह है इसका राजफाश हो गया. मधुमेह के प्रभावी नियंत्रण का पूरा हिसाब समझाया और कहा, भाई घडी पहनकर अब लगातार एक घंटा चलेगा तो सब कण्ट्रोल में रहेगा. तभी मित्र की व्यावसायिक बुद्धि और धन की अति उपलब्धता ने एक नया संवाद प्रस्तुत कर दिया…
…यार डॉक्टर , तुझे तो पता है की समय की कितनी कमी रहती है मुझे .
हाँ, सो तो सबको ही है समय की कमी.
..अरे यार, सुबह को जल्दी उठ नहीं पाता हूँ तो पैदल कब चलूँ?
जब समय मिले, चलो. समय का बंधन नहीं है, चलना जरुरी है.
..नहीं यार, सोचता हूँ कि ट्रेडमिल की मशीन ले लूँ.
क्यों?
….सुविधा रहेगी, घर ले घर में वाक कर लेंगे. मौसम, धुप, बारिश का बंधन भी नहीं रहेगा.
ये अच्छा आईडिया नहीं है.
…क्यों?
तू पैसे खर्च कर के भी ट्रेड मिल पर नहीं चलेगा , ये मुझे पता है.
…कैसे पता?
अरे, खेलकूद या पैदल चलने में एक मोटिवेशन लगता है जो घर की मशीन पर हो नहीं पाता है.
…मैं तो ट्रेडमिल ले लेता हूँ, मात्र ५० से ६० हजार का ही तो खर्च है.
कर ले भाई.
तीन माह बाद की जांच प्रतिकूल आई, ट्रेडमिल वैसी ही वीरान बीहड़ रूप गेस्ट रूम में पड़ी थी और मित्र निगाह चुराते मेरे समक्ष सलाह हेतु बैठे थे.
सड़क नापेगा!
…एं , क्या?
मैंने कहा…मेरे साथ.
हाँ चल!
सुबह ६ बजे तैयार रहना.
…और हम निकल गए पैदल पैदल टुकुर टुकुर, बिना संवाद, शीतल हवा के निर्मल आगोश में, मोर पक्षी की अनिन्ध्य ललकार में, अनसुने संगीत में, सन्नाटे के अप्रतिम शोर में जैसे पैदल चलते चलते समाधि लग रही हो. पवन देव अपने कोमल स्पर्श से शरीर को सहला रहे हों कि आज बहुत समय बाद, प्रभुजी तुम्हारे दर्शन हुए. सदूर, पूर्व दिशा में उर्जा के अलौकिक स्त्रोत के अनुपम दर्शन होने लगे, लगा द्रस्ती से मस्तिस्क की अप्रतिम प्यास पूर्ति हो रही हो और गीता ज्ञान के प्रथम श्रोता महात्मन सूर्य मुस्कान लिया हमारे स्वागत को अपनी बाहें फैलाये ८.२० मिनट की दुरी पर आमंत्रित कर रहे हों….प्रकाश की गति से चल पाने कि कमी लगी…आज मेरे पास होती तो समा लेता सूर्य को, उनके सौन्दर्य को.
लालिमा को नैनो में भरकर आत्म-तुष्टि को प्राप्त होने को थे की आसमान की गहराईयोंमें परिकित के चिल्लाते झुण्ड दिखाई पड़ने लगे. आश्चर्य का भाव स्वतः पैदा हो गया किउड़ते उड़ते ये पक्षी कैसे बात कर लेते है ये हरे रंग के तोते और भोजन पानी की अनजान मंजिल को कसे चले जाते हैं. इनका जी पी एस कितना सटीक होगा कि शाम पड़ते अपने अपने कोटर में वापिस. शांत मन से सड़क नापते विचारों की असीमित श्रंखला को टटोलते जा रहे थे की आसमान से श्वेत धवल सारस का जोददिखई दे गया. उसके पीछे बगुले शांत मन से धीमे धीमे हवा चीरते मन के स्वाद को मीता करते दिख पड़े.सड़क नप रही थी…..किन्तु नहीं नप रही थी. शरीर चल रहा था, मन स्थिर था, संवाद शुन्य था किन्तु मन का घड़ा ‘प्रचुर’ से पूरित था. मौन मुखर था, विधार घोड़े की मानिंद दौड़े पडा था. पैर लौट पड़े थे, मन पीछे जाने को विचलित था. सूर्य उर्जा की खुराक बिना किसी आरक्षण के सभी जीवों को देने के लिए उपर चढ़ चले थे और प्रथ्वी निरंतर घुमती जा रही थी.
मित्र थक चुके थे , सड़क नाप चुके थे, मेरी और धीरे से मुह उठाकर देखे और अचानक गले लग गए. आँख की पोर गीली हो आई. ये मुखर और वाचाल मित्र अब शब्दहीन था लेकिन सुन्दर मौन संवाद जारी था.
आखिर बोल पड़े, भाई आज, २५ साल बाद उगता सूरज देखा , पक्षियों की उड़ान देखी, गुनगुनी धुप महसूस की, पक्षी की आवाज सुनी, सन्नाटा सुना….नहीं तो सिक्कों की खनक में जीवन सुखमनी या दुखमनी दौड़ा, पता नहीं….
कुछ नहीं बोला मैं.
सौरमंडल का पर्यावरण आरोग्य की थाती है. शरीर, आपके लिए आपकी धरोहर है…सो तो प्रकृति भी है जो हमें निरंतर पोषित करती रहती है चाहे हम पर्यावरण के साथ खेल खेल रहे हों, माँ भारती निरंतर निष्पक्ष उर्जा के अविरत प्रदायन में उपलब्ध है. आरोग्य स्वास्थ्य की प्राकृतिक अवस्था है जो कृत्रिमता के आभाव में समस्त जीवों को प्राकृतिक रूप से प्राप्त है . एक मानव जीवन है जो आज से सौ वर्ष पूर्व पूर्ण आर्गेनिक खेती / पोषित था. अब नाइट्रोजन फॉस्फोरस यूरिया पोटेशियम और कीटनाशकों से जी एम ओ या संकर पैदावार से पोषित है.
चलो, देशी हो जायें….

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