Be the light by yourself

कुछ यूं अपनी हस्ती,

बनाये रखता हूँ….

हो भले नकली मुस्कान,

चेहरे पर बनाये रखता हूं ….

चेहरा ही मुखोटा है,

नम भाव बनाये रखता हूं।


ग़म हो या अतृप्त तृष्णा,

साधुभाव बनाये रखता हूँ….


स्वयं से मैं खुशी का साथ

सदा बनाये रखता हूं।


फटी कमीज या चप्पल टूटी,

आशा को ऊपर रखता हूं …


भले हो अमावस की काली रात,

मन उजला बनाये रखता हूं ।


कहे कोई कितना भी भला बुरा,

संतभाव बनाये रखता हूं….


धीर धर, होगा खाली मेरा आसमान,

ये हौसला बनाये रखता हूं।


यू मैं चलता हूं पैदल,

निगाहे जमीन पर रखता हूं ….


साकार हों, प्रभु या निराकार,

साक्षात्कार की आस बनाये रखता हूं।


माया मोह के जंजाल हजार,

प्रेम ही एक कुंजी ये जानो


छोटा सा हूं हिस्सा, प्रभु का,

याद ये बनाये रखता हूँ।


श्रद्धा संवेदना जिज्ञासा से,

आत्मखोज की यात्रा कैसे हो…
नर सेवा – नारायण सेवा एक मन्त्र ,

जिसका जोश बनाये रखता हूं।


तन मन धन हो फिर भी ,

नेति नेति का मायावी संसार…


जो है, उसमें राजी, का

वीतराग भाव बनाये रखता हूं.


सपना क्षणभंगुर है, श्रम है साध्य,

कदाचित जीवन भी हो,
परमहंस हो न हो ,

अप्प दीपो भव का दीप जलाये रखता हूं।


बीतता जाता वक़्त,

युं खर्च हुए जाते हम अविकल,
जहां से चले वहां ही पहुंचना,

ये विचार जलाये रखता हूं।

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