God has NO Sunday

उसका रविवार नहीं होता…..

इस बार चला जब , मैं इश्वर के दर से,
पूछा, क्या आकांक्षा है तेरी मृत्युलोक से
हा, भले कम देना बुद्धि, मित्र दें बुद्धिमान
भले लगे मेहनत, खूब मिले मुझे खूब ज्ञान.


कहा भले देना कम धन,मित्र देना साधुवान
मांगने का भाव न देना और न देना टूटने आस
जो कष्ट देने जाना पड़े, सुदामा को कृष्णा के पास
आलस का रस न डालना , मिले काम और सम्मान,


जो मित्र हों भले साधू, रहूँ दिल से मैं भी फ़क़ीर,
जीवन का मर्म समझूं , मुक्ति भी हो मेरी तकदीर
माथे से लगा लूं धरती की ये अनमोल रज
तुझको पा लूं देना मुझे भी इतना तो धीरज.


मंदिर शिवाले में खोजता फिरूं, चाह नहीं,
भीतर की यात्रा करूं, चाह और कुछ नहीं.
जानवर न बनूँ, भले हो आसान,
न बनूं खुदा, बस बन सकूँ इंसान.


कहते यहाँ, जटिल है आसान होना
और आसान है, इंसान की जटिल होना
आसमां उठा रखा यहाँ नराधम ने,
प्रकृति सहती सबको पालती पोषती


सेवा करते पेड़ पहाड़ नदियाँ,
न पहचान, नाहीं सम्मान कर पाते,
अनथक दौड़ती प्रथ्वी और सूरज क्यूंकि
उसका का रविवार नहीं होता.

One thought on “God has NO Sunday

Add yours

Leave a comment

Blog at WordPress.com.

Up ↑