Experience Prevails.

डॉक्टर – चाचा और गाँव की धरोहर

क्यों, बड़ा शहर छोड़ कर अब इस बुढ़ापे में गांव आ रहे हैं चाचा?
न जाने क्यों, बोले अब गांव के घर में ही रहूंगा और बाग बगीचा खेत खलिहान देखूंगा….


पिता-पुत्र का यह संवाद बम के गोले की भांति ठाकुर परिवार पर गिरा, जिनके डॉक्टर-चाचा अब शहर से सेवानिवृत हो गांव आने का सोच रहे थे. डॉक्टर-चाचा के हिस्से की जमीन भी पिछले 40 वर्ष से उनके भतीजे और परिवार जोत रहे थे. चाचा ने कभी ना हिसाब मांगा न भतीजे ने कभी दिया. भतीजे ने जब मन चाहा तो कभी गन्ने, कभी सरसों के दो टिन तेल तो कभी लोकमन गेहूं जैसे सहायता भिजवा दी.

चाचा शहर के प्रतिष्ठित डॉक्टर थे, शासकीय सेवा में रहे और जमीन से सदा जुड़े रहे या यूं कहें कि परिवार से सदा जुड़े रहे. अल्पायु में ही बड़े भाई के न रहने से अल्पायु भतीजे-भाभी मां सब का पालन पोषण किया और बड़े होने पर बिना बटवारा किए सारी खेती का जुम्मा भी भतीजे और भाभी मां को ही सौंप दिया. तीज- त्यौहार, ब्याह-सगाई, गमी-तेरहवीं को गांव आते, दिन दो-चार रहते और बिना किसी शिकायत के शहर में स्थित अपने गांव को लौट जाते. कालांतर में भाभी-मां भी नहीं रही. भतीजे और उनके तीन वयस्क बच्चों के जिम्मे पूर्ण खेती आ गई तो जैसे मानो कब्जा ही हो गया.


अब सेवानिवृत्त हो डॉक्टर-चाचा का मन, गांव की निर्मल आबो-हवा, ताजी सब्जी, शुद्ध बिना मिलावट के दूध के उपभोग और निश्चल आदमजात के संग समय बिताने को आतुर हो उठा और भतीजा परिवार को लगा कि खेती की जमीन का बंटवारा होगा और गांव में डॉक्टर-चाचा की चौधराहट भी जमेगी तो भतीजे का जो सिक्का चलता है वह कदाचित ना चले.


मातम जैसा माहौल पनप गया.


मन बड़ा विचित्र होता है एक बार नकारात्मक भाव मन में आ जाए तो खरपतवार की भांति तेजी से पनपता और फलता फूलता है. हमेशा बेतरतीब, बेहिसाब, बेख्याल, बेलिहाज और बेशर्म खरपतवार जो न केवल जमीन को बंजर कर दे बल्कि आबो-हवा भी दूषित प्रदूषित कर दे.


वही धनात्मक विचार को मन में कहीं कोने से खींच कर बाहर लाना पड़ता है जो हमेशा सकुचाया सा संवेदनशील सहमा सा कोने में खड़ा स्वयं संघर्ष को प्रस्तुत होता है. सकारात्मक विचार को अनुशासन की मिट्टी के साथ निरंतरता का पानी, संघर्ष की धूप और सामाजिक हवा पर्याप्त प्राप्त हो तब कहीं जाकर सफलता का फल प्राप्त होता है. तो भतीजा नकारात्मक विचारों से पोषित हो गया वह यह सोचे बिना की डॉक्टर-चाचा के आने से उसके उनके अनुभवों का लाभ भी तो उसे ही मिलेगा.

उधर डॉक्टर-चाचा ने गांव में डेरा जमाया कि चौपाल जमीं. औपचारिक चर्चाओं के दौर के बाद गांव की समस्याओं का दौर भी परोसा गया जैसे फसल के लिए पानी की कमी, पेयजल की समस्या, सेनेटरी व्यवस्था का अभाव, मच्छरों का प्रकोप, शराब की दुकान और बेरोजगारी जैसी आम समस्या मुंह-बाए जैसे डॉक्टर चाचा की प्रतीक्षा में ही थी.


जमीन से जुड़ा किसान भले ही डॉक्टर बन जाए मन से किसान ही रहता है. समस्या का समाधान भी किसान होता है जो वह द्वैत – अद्वैत में से द्वैत का चुनाव करे और जिला प्रशासन की ओर समाधान को ताके, तब उसे कुछ प्राप्त नहीं होता. वही किसान, अद्वैत की भांति भीतर की यात्रा करें तो समाधान भी भीतर ही मिले.

इसी सिद्धांत पर डॉक्टर चाचा ने गांव का नक्शा बनाया. सभी समाज के लोगों की पंचायत बिठाई और गांव के दोनों ओर अपनी स्वयं की जमीन पर दो तालाब बनाने का ऐलान कर दिया.

जैसे रेगिस्तान में मूसलाधार बारिश हो गई हो और जैसे प्यास से व्याकुल कंठ को शीतल जल से प्राप्त हो गया हो. पूरी पंचायत में तो जैसे हंगामा हो गया. तालाब बन जाएगा, तो पानी रुकेगा तो भूजल स्तर बढ़ेगा और बरस भर पानी की कोई समस्या ना होगी. देखते-देखते सकुचाया सा सहमा सहमा सा धनात्मक विचार बेशर्म नकारात्मक विचार को पीछे धकेलते हुए आगे आ खड़ा हुआ, खंभ ठोकते हुए.

बड़ी धन राशि डॉक्टर-चाचा ने दी तो हैसियत अनुसार किसी ने धन, किसी ने अनाज तो किसी ने श्रमदान किया और बारिश के पहले ही तालाब खुद कर तैयार हो गए. अब गांव इस प्रतीक्षा में है कि आओ मेघराज लाओ पानी आज, तो रोक लेंगे आपको सदा के लिए, बहने ना देंगे पाल जो बना ली है.

जहां यह कार्य संपन्न हुआ तो एक रविवार दो बोरवेल की मशीन आ गई और दो चिन्हित स्थानों पर गहरे कुएं खुद कर पानी की व्यवस्था कर दी गई. पंचायत बैठी कि यह कैसे हुआ तो डॉक्टर-चाचा बोल उठे, अरे जिला कलेक्टर को सूचना दी कि इस गांव में हमने दो तालाब बना लिए हैं और कहा कि अब आप दो ट्यूबवेल खुदवाने की अनुमति दे दे तो उन्होंने तुरंत आदेश कर दिए.

अब पानी की ओवरहेड टंकी बनाने की जगह ढूंढो और पानी का कहीं जमाव न हो पाए इस हेतू पंचायत से सहयोग ले लो. पाइपलाइन भी डलवा लेंगे, देखते देखते गांव के दसवीं तक के स्कूल में इंटरनेट लग गया, खेल के सामान की व्यवस्था हो गई तो रोजगार के लिए डॉक्टर चाचा ने गाय के दूध और उसके उत्पादों की सप्लाई -चैन शहर को स्थापित करने का मार्गदर्शन कर दिया गोबर का कंडा, गाय का दूध, घी, मट्ठा, दही, छाछ सब शहर जाने लगा. डॉक्टर चाचा खुद सुबह दौड़ने जाने लगे तो जवान होते बच्चे भी उनके साथ हो लिए. बीच गांव की खुली जमीन पर वॉलीबॉल का नेट लगा दिया तो खिलाड़ी खेलने लगे. शराब की दुकान तो जैसे बंद होने को आ गई. एक डॉक्टर या एक सज्जन व्यक्ति कैसे अपनी जमीन को अपनी प्रतिभा और दृष्टिकोण से अनमोल धरोहर बना देता है.


और इस गणतंत्र दिवस पर इस डॉक्टर-चाचा के गांव को प्रदेश के सबसे अच्छे गांव का पुरस्कार भी मिला.

Just Little of You.

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