CPU: Mantra to Purchase

संस्कार ऐसी सिद्धि है जो बचपन से बच्चों को पढ़ाई सिखाई जाती है और स्वयं के स्तर पर भी लगातार सीखी और समझी जाती है

चोरी ना करना,
झूठ ना बोलना,
गलत कार्य न करना प्राकृतिक नियमों या न्याय को सदैव सम्मुख रखकर कार्य करना
निर्बल का सहायक होना ….

जैसी शिक्षा बचपन से बच्चों को पढ़ाई और समझाई और सिखाई जाती हैं और लगातार उनका पालन भी सुनिश्चित किया जाता है.

किसी वस्तु के ख़रीदने के लिए भी इसी प्रकार का एक नियम है
सीपीयू
कोई भी व्यक्ति सीपीयू का तात्पर्य सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट से ले सकता है परंतु यहां पर

सी यानी है चॉइस (पसंद)
पी यानी है प्राइस (मूल्य)और
यू यानी है यूटिलिटी (उपयोगिता)

अर्थात किसी भी वस्तु के क्रय करने के लिए तीन बिंदुओं पर पैमाना बनाकर रखना चाहिए ताकि अनावश्यक वस्तु घर में ना आने पाये और अनावश्यक सामान (अटाला ) न बने
यह नियम घर के अतिरिक्त देश के द्वारा एयरक्राफ्ट कैरियर जैसे अथवा लड़ाकू विमान खरीदने जैसे अति महंगे देश की सुरक्षा से जुड़े उपकरणों या वाहनों से संबंधित हो तो भी उतनी ही लागू है जितने mein घर की छोटी पेंसिल के खरीदने के जैसे हो

जैसे आप पांच लोगों का परिवार हो तो उसके लिए पांच दर्जन केले नहीं खरीद लेते भले ही वह कितने भी सस्ते हो यानी चॉइस के साथ प्राइस अच्छी होने पर भी यूटिलिटी देखकर निर्णय लिया जाता है कि ये नष्ट होने योग्य भोजन सामग्री की मात्रा जितनी आवश्यक हो उतनी ही मात्रा क्रय की जाती है

सिर्फ शौक के लिए मर्सिडीज़ नहीं खरीदी जाती

सी याने चॉइस यानी आपकी पसंद में वह वस्त्र है या नहीं .

पी याने प्राइस यानी मूल्य अर्थात आपकी पसंद है परंतु मूल्य अत्यधिक होने पर पसंद कार्य नहीं करेगी और उसी प्रकार

यू याने यूटिलिटी यानी उपयोगिता उस वस्तु की क्या है

जैसे विवाह के अवसर पर दुल्हन को एक गुलाबी रंग का लहंगा पसंद आ जाए जिसकी कीमत ₹100000 हो परंतु यूटिलिटी एक दिन की होने के बावजूद उसे खरीदना तय हो जाता है क्योंकि वह एक दिन किसी भी बेटी के लिए उसके जीवन का सबसे बड़ा दिन है परंतु वही लहंगा दैनिक उपयोग के लिए ₹10000 में भी मिले तो खरीद नहीं जाएगा.

सी पी यू के नियम का पालन समाज के लिए उचित हो सकता है

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