सब छोड़ना पड़ता है….
प्रेम का पाठ पढ़े हो,
या घ्रणा में पड़े हो.
ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या,
जान सब छोड़ना पड़ता है.
कोई कारज को यदि,
भय लज्जा शंका उपजे
भले ठान रखी हो करने की,
ठिठक, सब छोड़ना पड़ना है.
दौड़ ब्रह्मा की, लोक माया का,
कोई प्रश्न को तो उत्तर गुरु.
अनुभव की शिक्षा अनमोल,
प्राण संकट में छोड़ना पड़ता है.
दौलत मकान की समेटी,
धन ओर कमी अकूत.
नशा अफीम का अद्भुत है,
परन्तु सब छोड़ना पड़ता है.
उत्तम प्राणी हो, अधम नीच
कर्म जीवन का असाध्य.
सजा ले काया चाहे जैसी,
एक दिन यह भी छोड़ना पड़ता है.
अवतार लिए हो कोई भी,
नरसिंह वामन कृष्ण राम
त्रिगुण की प्रवृत्ति अमोघ
निवृत्ति को जान छोड़ना पड़ता है.
मायालोक प्रथ्वी सूर्य का,
घूमते एक के पीछे एक
मृत्यु हरेक की लिखी रखी,
हर हाल लीला छोड़ना पड़ता है.

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