सदा अपनी….
गलती मेरी ?
कैसा विज्ञान है !
नहीं मानूंगा,
ऐसा विधान है.
बुद्धि राजी नहीं,
गलती मेरी नहीं.
भले राज्य जाये,
सुधरना मुझे नहीं.
अहं है पिता,
गलती मानसपुत्र.
महाभारत खेली,
गवाएं सब सूत्र.
गलती और दंड
साथ साथ चलते.
गलती होते ही,
दंड से सब बचते.
धाराएं बनी सैकड़ों,
ताकि सत्ता सुहागन रहे.
मानस मन मलिन,
नियम सदा तोड़ता रहे.
गलती सदा विकारी,
विवेक फेर देती.
होते ही नकारने का,
निर्णय ले लेती.
जो अल्प हो बुद्धि,
हठ से उत्तम कथनी करनी.
जो पर्याप्त हो बुद्धि,
तो गलती माने सदा अपनी.
जो गलती स्वीकारे,
मां भी उसे पुचकारे.
गलती मान के जो सुधरो,
तो पिता भी सदा संवारे.
गलती का साधु धर्म,
अनुशासन से रहे परे.
न मानने का कर्म,
दोष, किसी और का धरे.
त्रुटी छोटी या बड़ी,
न्याय से सही ठहराए.
जिद को ठाने,
सुप्रीम कोर्ट तक जाये.
मेरी गलती सदा छोटी,
तेरी बहुतई बड़ी.
मैं तो दया के काबिल,
तुझको सजा बड़ी.
गलती पुराण भिन्न,
करे सब कोई.
माने तो प्रभु होय,
वैकुण्ठ वास होई.

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