God of Death who takes us to final destination

यमदूत होना!!

मुझे कुछ नहीं,
यमदूत होना.
आत्मा की परम से,
यात्रा होना.

यमदूत का कारज,
चिंतामणि को हरे.
ब्रह्मज्ञानी को भी,
परमयोग से भरे.

अज्ञानी को भी,
कुछ यूं थामे.
जैसे वज्र पंडित,
चले बैकुंठ धामे.

यमदूत करे शुद्ध,
क्या मानव क्या बुद्ध.
मेरा उद्घोष, मैं मुक्त
यम के हत्थे मैं भी बुद्ध.

विष अमृत की धरा ये,
सत्य अंतिम, यमदूत.
माया से प्रथक,
कहने को अवधूत.

यमदूत हैं स्वतंत्र,
अद्वैत में संलिप्त.
दुराचार से मुक्त,
माया मोह से अलिप्त.

मन की गति से दौड़ते,
इस छोर से उस छोर को .
कहने को कृष्ण शरीर,
नहीं दिखे किसी ओर को .

यमदूत हैं शाश्वत,
आत्मा के अनुरागी.
मुक्तिदाता है वो,
खुद नहीं अभिलाषी.

वर्ण वंश के विविध,
झंझावतों से परे.
ऐसा कोई नहीं जो,
यमदूत के हत्थे न चढ़े.

जब सिरहाने ये प्रकटें,
होश, प्राण से पहले छूटें.
सत्यान्वेषी भी हाथ जोडें,
नेति नेति का पथ भी छूटे.

अप्प दीपो भवः का जाप,
कुल से विस्मृत हो जाये.
चैरेवती चैरेवती का अंत सजे,
ते त्यक्तेन भुन्जितः याद आये.

जो यम के दर्शन होवें,
अहं उड़े भांति कपूर,
शरीर को यूं खोना है,
तो परम नया पाना है.

यम से भेंट तो निश्चित,
लपेटे रहो भले नौ रस.
जीवन यात्रा रहस्यमयी,
और दसवां यमदूत रस.

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