Doctor’s Message

डॉक्टर्स दिवस पर विशेष

1 जुलाई को भारत में डॉ. बी सी राय के जन्मदिवस के अवसर पर डॉक्टर्स डे के रूप में मनाया जाता है. डॉक्टर बी सी राय, ना केवल प्रख्यात चिकित्सक थे बल्कि राजनीति के गहन जानकार थे जिन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के दायित्व का भी निर्वहन किया था.
डॉक्टर्स डे के अवसर पर चिकित्सकों को उनके नैतिक दायित्व को पुनः याद करना होता है कि वह किस प्रकार से नागरिकों के स्वास्थ्य के संबंध में सहयोग का हाथ बाधा सकते हैं. औषधि के प्रयोग एवं शल्य चिकित्सा के अतिरिक्त स्वस्थ बने रहने के उपायों का प्रचार प्रसार न केवल देशवासियों बल्कि चिकित्सकों के लिए भी उतना ही अवश्यक है.

रोगों से बचाव के संबंध में बच्चों, बड़े-बूढ़ों के लिए विकसित हुए वैक्सीन के माध्यम से ना केवल होने वाली बीमारियों के विरुद्ध सुरक्षा प्रदान कर सकें. इसी प्रकार समान रूप से बच्चों एवं बड़ों को व्यायाम या योग के माध्यम से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को उच्चतर स्थान पर बनाए रखने की जन जागृति भी समय की बड़ी आवश्यकता है. इसी प्रकार भारत में प्रचलित संक्रामक रोगों एवं जीवनशैली रोगों से बचा जा सके तथापि यदि कोई संक्रामक या जीवन शैली रोग मानव शरीर में घर बना ले तो प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सके.

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को नियमित व्यायाम, योगाभ्यास, प्रतिदिन 5 किलोमीटर पैदल चलने के जैसे साधारण उपायों से बनाए रखा जा सकता है.


पिछले कुछ दशकों से बच्चों की खेल के मैदान में गतिविधियां कम हुई हैं जिसके चलते फुटबॉल हॉकी जैसे फील्ड गेम में अपनी पढ़ाई के चलते बच्चे कम सम्मिलित होते हैं. फील्ड गेम मैं प्रतिदिन 1 घंटे देने से बच्चों की अस्थियों की मजबूती, मांसपेशियों का व्यायाम, पसीने से शरीर का डिटॉक्सिंग के साथ-साथ आप मित्रों-प्रतिद्वंद्वियों के साथ आपसी सामंजस और प्रतिद्वंदिता की भावना का मित्रतापूर्वक विकास होता है. खेल में हुई हार जीत को खेल भावना से स्वीकार करने की मानस भी विकसित होती है जो आगे के जीवन में कैरियर बनाने के समय एक स्वस्थ मानस के साथ आगे बढ़ने को प्रेरित भी करती है. भिन्न शब्दों में कहा जाए तो फील्ड गेम के माध्यम से बच्चों में हार जीत की भावना का विकास होने से बच्चों में आत्महत्या की भावना का हास संभव है और वह बेहतर तरीके से अपने जीवन काल में हार और जीत को स्वीकार कर पाएंगे.


विज्ञान का विकास होने से अब मेडिकल शिक्षा और बीमारियों का शीघ्र निदान एवं उपचार नए उपायों से बेहतर रूप से संभव हो पा रहा है. स्वाभाविक है नई जांचें, नए रोबोटिक उपकरण, कैंसर के पूर्व पहचान की नई पैथोलॉजी की जांचें, रेडियोलॉजी के इंटरवेंशन इत्यादि के चलते मानव शरीर में पनपने वाली बीमारियों के अर्ली डिटेक्शन तथा यथोचित उपचार में तेज गति से परिवर्तन आया है. कहीं ना कहीं संभवत उपचार महंगा भी हुआ है. यह सब नए वैज्ञानिक उपायों के माध्यम से शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के संदर्भ में उचित भी प्रतीत होता है. कटे हुए हाथ को जोड़ देना, मस्तिष्क में रक्त के थक्के को निकाल लेना, मस्तिष्क की नसों के असामान्य विकारों को सुधार लेना, हृदय की 100% अवरुद्ध धमनियों को पूर्णतः बदल देना, मस्तिष्क को रक्त ले जाने वाली धमनियों मैं उपस्थित अवरोध को हटा लेना जैसे मॉलिक्यूलर या आणविक स्तर के शल्य चिकित्सा से ना केवल मानव के प्राणों की रक्षा होती है बल्कि एक पूर्ण परिवार सुरक्षित हो जाता है. यही प्रयास कहीं ना कहीं देश के समग्र विकास में सहयोग भी देते है. इसी प्रकार अंग प्रत्यारोपण, जोड़ प्रत्यारोपण में भी क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं. इस आधुनिक शल्य चिकित्सा के चलते अब घुटनों के ओस्टियोआर्थराइटिस जैसी लाइलाज बीमारियों या कुल्हे के जोड़ के अवस्कुलर नैक्रोसिस जैसे रोग के माध्यम से होने वाली विकलांग जीवन को समुचित सुधर कर पुनः प्रचालन में लाया जा रहा है. टाइटेनियम, स्टील, सीमेंट इत्यादि के जोड़ों के प्रोस्थेसिस के माध्यम से ना केवल दर्द से मुक्ति मिल रही है बल्कि आगामी 20 से 30 सालों के लिए एक सामाजिक सुरक्षा भी उपस्थित हो रही है जिसके चलते परिवार का भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है. इसी प्रकार असामयिक मौत होने पर नेत्रदान के अतिरिक्त त्वचा, किडनी, लीवर, ह्रदय के प्रत्यारोपण की भी क्रियाएं नया जीवन प्रदान कर रही हैं.

प्रत्यारोपण उपरांत, नई औषधियों के माध्यम से graft-versus-host की रिएक्शन को भी बेहतर और प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा रहा है ताकि नए शरीर में प्रत्यारोपित अंग बेहतर प्रकार से कार्य कर सकें. विज्ञान के क्षेत्र में उन्नति का विशेष लाभ चिकित्सा क्षेत्र को भी मिला है और सी.टी.स्कैन और एम.आर.आई. मशीनों के साथ-साथ अब पेट-स्कैन के माध्यम से कैंसर के प्रभावी नियंत्रण को भी न्याय संगत रूप से पहचाना जा सकता है. डिजिटल सब-ट्रैक्शन एंजियोग्राफी जैसी उच्च स्तर की जांचों के माध्यम से धमनियों में होने वाले विकारों को पहचाना जा रहा है. अब उच्च स्तर की शल्य चिकित्सा में हृदय में स्थित वाल्व के खराब होने पर कृत्रिम वाल्व रिप्लेसमेंट की शल्यक्रिया के अतिरिक्त वाल्व रिपेयर की दिशा में भी बड़ी प्रगति हुई है. ये सुविधाएं मल्टी स्पेशलिटी चिकित्सालय में स्वाभाविक रूप से उपलब्ध हैं और मानव जीवन को समुचित गुणवत्ता भी प्रदान कर रही हैं.

सबसे बड़ी बात यह है कि देश में प्रचलित मेडिकल कॉलेजों में परास्नातक पाठ्यक्रमों के माध्यम से अति उच्च स्तर के चिकित्सक प्रशिक्षित हो रहे हैं जिन्होंने अपने भागीरथी प्रयासों से शिशु की नॉर्मल डिलीवरी के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के गर्भकाल में होने वाले विकारों की जांच तथा उपचार को भी संभव कर दिखाया है. इसी प्रकार रोगों के बचाव के संबंध में विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा मान्य 18 बीमारियों के वैक्सीन की उपलब्धता के अतिरिक्त मलेरिया जैसी घातक बीमारी के वैक्सीन का अनुसन्धान अपने अंतिम चरण में हैं और संभावना है कि वह शीघ्र ही समाज को उपलब्ध होंगे. इसी के साथ कैंसर जैसी बीमारियों के नियंत्रण में लाने के लिए वैक्सीन के विकास हेतु अनिवार्य रिसर्च हो रही है और इस बात की संभावना है कि अगले कुछ वर्षों में कैंसर जैसी घातक बीमारी के लिए भी हमें वैक्सीन उपलब्ध होंगे.

परंतु शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जो आधारभूत नियम आज से हजार साल पहले प्रासंगिक थे वे आज भी प्रासंगिक हैं और इसीलिए इस चिकित्सक दिवस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन नागरिकों का आव्हान करता है कि वह प्रतिदिन प्रातः 60 मिनट के लिए अपने शरीर को दें. साधारण पैदल चलने के प्रयास या साइकिल चलाने या योगाभ्यास करने या तैरने या रैकेट स्पोर्ट्स या फील्ड गेम का समावेश किया जाना चाहिए ताकि होने वाले इस भौतिक श्रम से आपकी अस्थियों पर अनिवार्य दबाव रहे, मांसपेशियां चक्की की भांति चलें, रक्त का तेज प्रवाह हो, पसीने का निकास हो और रक्त में बहने वाली शर्करा का प्रभावी नियंत्रण हो.

रक्तचाप न्यून स्तर पर आए, टारगेट हार्ट रेट (220-आयु) के आसपास पहुंचने का प्रयास हो ताकि हृदय की मांसपेशियां सक्षम बनी रहे, किडनी में रक्त का प्रवाह तेज हो ताकि मूत्र का छनन बेहतर हो, लीवर में रक्त प्रवाह बढे और पसीने से विषैले तत्वों का निकास हो ओर शरीर स्वस्थ बना रहे. इसके साथ ही इस बात पर भी विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक होगा कि पर्याप्त मात्रा में प्रतिदिन जल सेवन हो, शरीर की अम्लता कम बनाए रखने के लिए या छारीय स्तर बनाए रखने के लिए छाछ, दही, दूध के अतिरिक्त मौसमी फलों का समावेश हो और फास्टफूड, कोल्ड-ड्रिक्स, नशीले पदार्थ, सिगरेट इत्यादि का त्याग हो तो चिकित्सक दिवस मनाना सार्थक होगा. भोजन के मार्गदर्शन हेतु हम सब परिचित हैं कि घर का बना भोजन ही हमें स्वस्थ रखने में अत्यधिक सहयोग देता है.

बाजार के खाने में गुणवत्ता संदिग्ध हो सकती है तथा मिलावट की संभावना हो सकती है जिसके चलते आप युवा हैं तो शुरुआती दौर में आरंभिक दौर में संभवत कोई परेशानी ना हो परंतु आयु बढ़ने के साथ शरीर अशुद्ध होता जाता है और समस्याएं उत्पन्न होने लगती

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